हिंदू धर्म में पेड़ों पर कलावा क्यों बांधा जाता है? जानें इसके पीछे का धार्मिक रहस्य
Published by : Neha Kumari Updated At : 05 Apr 2026 12:41 PM
पेड़ पर कलावा बांधते हुए श्रद्धालु
Hindu Ritual: आपने अक्सर श्रद्धालुओं को पेड़ों की पूजा करते हुए और उन पर कलावा बांधते देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वे ऐसा क्यों करते हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए है. आइए आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं कि पेड़ों पर कलावा बांधने के पीछे छिपे धार्मिक कारण क्या हैं.
Hindu Ritual: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान कलावा (मौली) बांधने की परंपरा सदियों पुरानी है. अक्सर हम देखते हैं कि लोग न केवल अपनी कलाई पर, बल्कि कई पवित्र पेड़ों पर भी कलावा बांधते हैं. यह केवल एक धागा नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, सुरक्षा और संकल्प का प्रतीक है.
किन-किन पेड़ों और पौधों पर कलावा बांधा जाता है?
हिंदू धर्म में माना जाता है कि कुछ पेड़ और पौधे, जैसे- पीपल, बरगद और तुलसी में स्वयं भगवान का वास होता है. ऐसे में इनकी आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
पीपल: मान्यता है कि पीपल के पेड़ में तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का वास होता है. ऐसे में इसकी पूजा कर इस पर कलावा बांधने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
बरगद (वट): वट वृक्ष को लंबी आयु और अमरता का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस पेड़ में त्रिदेव, यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है. माताएं और पत्नियां अपने परिवार की लंबी उम्र के लिए इसके चारों ओर कलावा लपेटती हैं.
तुलसी: तुलसी में मां लक्ष्मी का वास माना जाता है. यहां कलावा बांधना घर में सुख-समृद्धि और धन के आगमन का संकेत माना जाता है.
कलावा क्यों बांधा जाता है?
संकल्प और मनोकामना की पूर्ति: पेड़ पर कलावा बांधना एक प्रकार का ‘मानसिक संकल्प’ होता है. जब भक्त अपनी किसी विशेष इच्छा के लिए प्रार्थना करते हैं, तो वे साक्ष्य के रूप में कलावा बांधते हैं. मान्यता है कि जब तक वह धागा वहां रहता है, आपकी प्रार्थना ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ी रहती है.
रक्षा सूत्र: कलावे को ‘रक्षा सूत्र’ भी कहा जाता है. मान्यता है कि जिस तरह कलाई पर बंधा कलावा व्यक्ति की रक्षा करता है, उसी तरह पेड़ों पर इसे बांधना प्रकृति और मनुष्य के बीच एक सुरक्षा कवच तैयार करता है. यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखने और सकारात्मकता का संचार करने का माध्यम माना जाता है.
कलावा बांधते समय ध्यान रखने योग्य बातें:
- शुद्धता: हमेशा पेड़ों पर स्नान करने के बाद ही कलावा बांधें.
- परिक्रमा: कलावा बांधते समय पेड़ की 3, 5 या 7 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है.
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