एसआइआर हीयरिंग : बुजुर्ग भिखारिन भी लाइन में खड़ी
Updated at : 22 Jan 2026 10:31 PM (IST)
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माज में ऊंच-नीच, अमीर-गरीब और शिक्षित-अशिक्षित का फर्क एसआइआर की हीयरिंग में मानो मिटता नजर आ रहा है. नेता, अभिनेता, वैज्ञानिक, नोबेल पुरस्कार विजेता से लेकर समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों तक सभी को एक ही कतार में खड़ा होना पड़ रहा है.
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हुगली.
समाज में ऊंच-नीच, अमीर-गरीब और शिक्षित-अशिक्षित का फर्क एसआइआर की हीयरिंग में मानो मिटता नजर आ रहा है. नेता, अभिनेता, वैज्ञानिक, नोबेल पुरस्कार विजेता से लेकर समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों तक सभी को एक ही कतार में खड़ा होना पड़ रहा है. पंगु हाथ के साथ सुनवाई में पहुंचीं पारुल बनर्जी : चंदननगर एसडीओ कार्यालय में हीयरिंग के दौरान ऐसा ही दृश्य सामने आया, जहां एक वृद्धा पंगु हाथ और कमजोर शरीर के बावजूद झोला बैग में एसआइआर के कागजात लेकर सुनवाई में पहुंचीं. उनका नाम पारुल बनर्जी है. वह चंदननगर के निरंजन नगर नंबर 2 इलाके की निवासी हैं. पति के निधन के बाद बेटी और नाती के साथ किसी तरह जीवन यापन कर रही हैं.पारुल बनर्जी पहले झाड़ू-पोछा का काम करती थीं, लेकिन गिरने से हाथ टूट गया. हाथ सही से न जुड़ पाने के कारण उन्हें दिव्यांग प्रमाणपत्र मिला. अब उम्र के इस पड़ाव में भीख ही उनकी रोजी-रोटी है. सुनवाई में आने का मतलब एक दिन की आमदनी खत्म होना है, इसलिए हीयरिंग के दौरान भी वह भीख मांगती रहीं.
पारुल बनर्जी का कहना है कि वह 1972 से वोट दे रही हैं, फिर भी उन्हें हीयरिंग के लिए बुलाया गया. अब टूटे हाथ से कोई काम संभव नहीं है, इसलिए भीख मांगकर घर चलाना पड़ता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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