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एसआइआर की हियरिंग में बीमार बुजुर्गों को हो रही परेशानी

Updated at : 30 Dec 2025 1:11 AM (IST)
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एसआइआर की हियरिंग में बीमार बुजुर्गों को हो रही परेशानी

सोमवार को बारासात एक नंबर ब्लॉक के छोटा जगुलिया आइटीआइ कॉलेज में ऐसी ही तस्वीर देखने को मिली.

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सुनवाई सेंटर जाने में हजारों रुपये कर रहे खर्च बारासात. एसआइआर की हियरिंग में इन दिनों बीमार बुजुर्गों को भी जाना पड़ रहा है, जिस कारण से उन्हें काफी परेशानी हो रही है. यहां तक की कईयों ने आरोप लगाया है कि इस एसआइआर के कारण ही उन्हें पांच हजार रुपये तो किसी ने दस हजार रुपये किराये पर कार से हियरिंग के लिए जाना पड़ा है. सोमवार को बारासात एक नंबर ब्लॉक के छोटा जगुलिया आइटीआइ कॉलेज में ऐसी ही तस्वीर देखने को मिली. जानकारी के मुताबिक, बारासात और मध्यमग्राम की सुनवाई छोटा जगुलिया आऐइटीआइ कॉलेज में हो रही है. बारासात के हृदयपुर कैलाशनगर की रहने वाली 85 साल की शोभारानी भौमिक और 66 साल की बबली दत्ता सुनवाई में गयी थीं. शोभारानी देवी, जो उम्रजनित बीमारी से परेशान है, उन्हें उनके दामाद रतन रॉय कार में लेकर गये थे. चूंकि उनमें लाइन में खड़े होने की ताकत नहीं थी, इसलिए उनसे कार में बैठे-बैठे ही सारे कागज़ात पर साइन करवा लिये गये. दामाद रतन रॉय ने कहा कि उन लोगों को एसआइआर के लिए आने-जाने पर कार किराये पर लेनी पड़ी, जिसके लिए पांच हजार से अधिक लग गये. बीमार बुजुर्ग को इतनी दूर लाना पड़ा. अगर रास्ते में कुछ हो जाता, तो कोई रास्ता नहीं था. बीमार शोभारानी देवी के अलावा इसी तरह से एक और बबली देवी भी बीमार थी, उन्हें पेसमेकर लगाया गया है, वाल्व रिप्लेसमेंट हुआ है और पैर में रॉड लगी है. उन्हें भी सोमवार को हियरिंग में किराये पर कार करके आना पड़ा. हालांकि हियरिंग सेंटर के स्टाफ ने आकर कार के अंदर उनके डॉक्यूमेंट्स ले लिये, लेकिन उनकी बेटी बी दत्ता ने कहा कि मां नहीं चल सकती हैं, इसके बावजूद मां को यहां कार रिजर्व करके लाना पड़ा. जब बीएलओ को बताया, तो उन्होंने कहा था उन्हें लाना तो पड़ेगा. रिम्पा मंडल और श्वेता देबनाथ बच्चे के साथ लाइन में खड़ी थीं. उन्होंने कहा कि अपने बच्चे को गोद में लेकर हियरिंग में आने के लिए मजबूर होना पड़ा. बारासात नगरपालिका के चेयरमैन सुनील मुखर्जी सोमवार को हियरिंग सेंटर पहुंचे थे. उन्होंने कहा करीब तीन घंटे वह हियरिंग सेंटर में रहे. लोगों की तकलीफ आंखों से देखा. हियरिंग के नाम पर इतना बुरा बर्ताव पहले कभी नहीं देखा था. हियरिंग में सिर्फ कागज़ जमा लेते हैं, लेकिन कोई रसीद भी नहीं दी जाती है. अगर जमा किये गये कागज़ खो गये तो कौन ज़िम्मेदारी लेगा. इसी तरह से आमडांगा की एक 60 वर्षीय महिला श्यामली घोष आमडांगा में एसआइआर की हियरिंग में शामिल होने के दौरान बीमार पड़ गयीं. उनका हॉस्पिटल में इलाज किया गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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