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मतदाता सूची में विलंब को लेकर बोले शुभेंदु : समय-सीमा चूके, तो चुनाव नहीं

Updated at : 16 Nov 2025 1:09 AM (IST)
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मतदाता सूची में विलंब को लेकर बोले शुभेंदु : समय-सीमा चूके, तो चुनाव नहीं

पोलबा में बिरसा मुंडा जयंती के कार्यक्रम में शामिल होकर नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार और बीएलओ व्यवस्था को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की

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प्रतिनिधि, हुगली.

पोलबा में बिरसा मुंडा जयंती के कार्यक्रम में शामिल होकर नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार और बीएलओ व्यवस्था को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के असहयोग के कारण बीएलओ कर्मियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है. एक-एक प्रविष्टि करने में 20 मिनट लगते हैं, फिर भी सरकार एसआवआर प्रक्रिया को लेकर गंभीर नहीं है. अधिकारी ने कहा कि बिहार में चार महीने के लिए एक हजार डेटा एंट्री ऑपरेटर नियुक्त किये गये थे, लेकिन पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग का प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद मुख्यमंत्री के निर्देश पर वित्त विभाग ने अनुमति नहीं दी. इससे बीएलओ गंभीर संकट में हैं.

उन्होंने चेतावनी दी कि हमारी पार्टी को कोई हड़बड़ी नहीं है, लेकिन यदि सात फरवरी तक मतदाता सूची प्रकाशित नहीं हुई, तो चुनाव नहीं होंगे. पांच मई को राष्ट्रपति शासन लागू हो जायेगा, यह संविधान का प्रावधान है।

बंगाल जिहादी सप्लाई का हब बन चुका है : नेता प्रतिपक्ष

शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि राज्य आतंकियों की पनाहगाह बन गया है. उनके अनुसार, हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी का स्रोत बंगाल रहा है. उन्होंने मुर्शिदाबाद के हरिहरपाड़ा में पकड़े गये साद शेख का उदाहरण दिया, जो साढ़े दो साल तक मदरसा चलाता रहा और तीन बार तृणमूल को वोट दिया.

महिला वोट बैंक नहीं, बंगाल में आरजी-कर फैक्टर प्रभावी होगा

उन्होंने कहा कि बिहार की तरह बंगाल में सिर्फ महिला वोट फैक्टर नहीं चलेगा. यहां आरजी-कर फैक्टर और कई अन्य मुद्दे प्रभावी होंगे. अधिकारी का दावा है कि लाड़ली बहना जैसी योजनाएं सबसे पहले भाजपा शासित राज्यों में शुरू हुईं, जहां केवल भत्ता ही नहीं, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा भी प्रदान की जाती है.

आरक्षण, एसटी प्रमाणपत्र व आदिवासी विकास पर निशाना

अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य में बड़े पैमाने पर फर्जी एसटी प्रमाणपत्र बांटे गये, जिससे वास्तविक आदिवासी समुदाय के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि नौ रेसिडेंशियल स्कूल क्यों नहीं बनाये गये और आदिवासी मॉडल गांवों को मंजूरी क्यों नहीं दी गयी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाये जाने से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार आदिवासी समाज को सर्वोच्च सम्मान देना चाहती है.

राज्यपाल व प्रधानमंत्री की टिप्पणियों पर दी प्रतिक्रिया

राज्यपाल के बयान कि बुलेट नहीं, बैलेट से वोट हो पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वह लंबे समय से राज्य में हैं और उनका यह अनुभवजन्य आकलन है. प्रधानमंत्री द्वारा बंगाल की स्थिति को लेकर की गयी जंगलराज टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जो कह रहे हैं, वह पूरी तरह सही है

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUBODH KUMAR SINGH

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