शिक्षा विभाग में पुरानी अवैध नियुक्ति की हो सकती है जांच

उन्होंने कहा कि वाममोर्चा सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन शिक्षा मंत्री द्वारा नियमों का पालन किये बिना कई नियुक्तियां किये जाने के आरोप सामने आये हैं.
शिक्षा विभाग में नियुक्ति से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान उच्च अदालत ने की टिप्पणी
कोलकाता. कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राय चटर्जी ने बुधवार को शिक्षा विभाग में नियुक्ति से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि वाममोर्चा सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन शिक्षा मंत्री द्वारा नियमों का पालन किये बिना कई नियुक्तियां किये जाने के आरोप सामने आये हैं.सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि यदि राज्य सरकार चाहे, तो इस बात की जांच कर सकती है कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने किस प्रकार सरकारी फंड का उपयोग करते हुए कथित रूप से अवैध नियुक्तियां कीं. उन्होंने यह भी कहा कि मामले की विस्तृत जांच होने पर ऐसी कई अन्य नियुक्तियां भी सामने आ सकती हैं.
क्या है मामला
मामले के अनुसार, तिथि अधिकारी नामक अभ्यर्थी को विकास भवन में अनुबंध के आधार पर डिपार्टमेंटल असिस्टेंट के रूप में नियुक्त किया गया था. वर्ष 2011 में नयी सरकार के गठन के बाद शिक्षा विभाग ने 2012 में उनकी सेवा समाप्त कर दी. इसके खिलाफ तिथि अधिकारी ने कलकत्ता हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी. सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि संबंधित पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक था, लेकिन उस समय नियमों को दरकिनार कर निजी प्रभाव के आधार पर नियुक्ति दी गयी. उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित कर्मचारी का वेतन सर्व शिक्षा मिशन फंड से दिया जा रहा था, जो एक सरकारी फंड है.
अदालत ने कहा कि अनुबंध कर्मचारी को सरकारी फंड से वेतन देना और नियुक्ति प्रक्रिया का पालन न करना वित्तीय संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है. न्यायालय ने संकेत दिया कि राज्य सरकार चाहे, तो पूरे मामले की जांच कर सकती है.प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
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