शुभेंदु अधिकारी के लिए बंगले की तलाश, सीएम ऑफिस में भी बदलाव संभव

शुभेंदु अधिकारी
Shubhendu Adhikari: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अब राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्रों में भी बड़े बदलाव की आहट है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कार्यभार संभालने के बाद सबसे बड़ी चर्चा उनके आवास को लेकर है. सिर्फ घर ही नहीं, मुख्यमंत्री के दफ्तर को लेकर भी बड़ा बदलाव होने जा रहा है.
मुख्य बातें
Shubhendu Adhikari: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में कोई एक तयशुदा मुख्यमंत्री आवास नहीं है. ममता बनर्जी से पहले ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य जैसे मुख्यमंत्री भी सरकारी आवासों जैसे राजभवन के पास के बंगले में रहे थे, लेकिन ममता ने इस परंपरा को तोड़ दिया था. पिछले 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री अपनी निजी आवास में ही रहती थी. अब नये मुख्यमंत्री के लिए बंगाले की तलाश की जा रही है. राज्य सचिवालय की ओर से कहा जा रहा है कि सरकार के पास कोलकाता के पॉश इलाकों जैसे अलीपुर या राजभवन के करीब में कई वीवीआईपी बंगले हैं, जिन्हें सीएम आवास के रूप में उपयोग किया जा सकता है. अगले कुछ दिनों में पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा सीएम के लिए तय किए गए बंगले की आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है.
लोक भवन के आसपास ही होगा शुभेंदु का नया ठिकाना
मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी के सामने दो विकल्प हैं. पहला- ममता की राह, वह भी किसी साधारण घर में रहकर सादगी का संदेश देंगे. हालांकि उनका अपना घर मेदिनीपुर में है. कोलकाता में नहीं. इसलिए यह व्यावहारिक तौर पर संभवन नहीं है. दूसरा विकल्प यह है कि वह एक आधिकारिक ‘सीएम हाउस’ स्थापित करें, जहां से सरकार का कामकाज सुचारू रूप से चल सके और सुरक्षा व्यवस्था में आम जनता को परेशानी न हो. भाजपा कार्यालय की माने तो शुभेंदु अधिकारी कोलकाता में राजभवन के पास स्थित किसी सरकारी बंगले को अपना आधिकारिक निवास बना सकते हैं. इसके पीछे तर्क यह है कि एक मुख्यमंत्री को विदेशी मेहमानों, अधिकारियों और जनता से मिलने के लिए एक व्यवस्थित कार्यालय और आवास की आवश्यकता होती है.
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नबन्ना से राइटर्स बिल्डिंग जा सकता है सीएम कार्यालय
भाजपा कार्यालय के एक पदाधिकारी की माने तो सिर्फ घर ही नहीं, मुख्यमंत्री के ‘दफ्तर’ को लेकर भी बड़ा बदलाव होने जा रहा है. ममता बनर्जी ने सचिवालय को ‘राइटर्स बिल्डिंग’ से हटाकर हावड़ा के ‘नबन्ना’ (Nabanna) में शिफ्ट कर दिया था. भाजपा के संकल्प पत्र और शुभेंदु अधिकारी के संकेतों के अनुसार, सरकार वापस ‘राइटर्स बिल्डिंग’ से कामकाज शुरू करने की योजना बना रही है, जो बंगाल की ऐतिहासिक सत्ता का केंद्र रहा है. शुभेंदु अधिकारी को करीब से जाननेवाले बताते है कि वह परंपराओं को तोड़ने और नई व्यवस्थाएं बनाने में विश्वास रखते हैं. जहां ममता बनर्जी का कालीघाट वाला घर ‘संघर्ष’ का प्रतीक था, वहीं शुभेंदु अधिकारी का नया आधिकारिक आवास ‘सुशासन’ और ‘प्रशासनिक पारदर्शिता’ का केंद्र बन सकता है.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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