ऋतब्रत बंदोपाध्याय बने बंगाल विधानसभा में नेता विरोधी दल!, तृणमूल के 58 बागी विधायकों का मिला समर्थन
Published by : Ashish Jha Updated At : 03 Jun 2026 1:14 PM
ममता बंदोपाध्याय और ऋतब्रत बंदोपाध्याय
Ritabrata Bandopadhyay: तृणमूल के बागी विधायकों ने न केवल नेता विरोधी दल का चुनाव कर लिया है, बल्कि बागियों ने विधायक दल की बैठक में मुख्य सचेतक के तौर पर मुर्शिदाबाद के विधायक व पूर्व मंत्री अख्तारुज्जमां को चुन लिया है.
कोलकाता से विकास कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
Ritabrata Bandopadhyay: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है, जिससे पार्टी के टूटने के कयास तेज हो गए हैं. बुधवार को पार्टी के असंतुष्ट विधायक ऋतब्रत बनर्जी 59 विधायकों के समर्थन का पत्र लेकर विधानसभा पहुंचे, जिसके बाद राज्य के सियासी गलियारों में हलचल मच गई है.

समर्थन का पत्र सौंपते विधायक.
बागी विधायकों की बैठक और बड़े दावे
ऋतब्रत बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस के कई अन्य प्रमुख विधायक भी एक-एक कर विधानसभा पहुंचने लगे. इनमें अरूप राय, शिउली साहा, अखरुज्जमा, संदीपन साहा, सबीना यास्मिन, चंद्रनाथ सिंह और प्रसून बनर्जी जैसे नाम शामिल हैं. इन बागी विधायकों ने विधानसभा के नौशाद अली कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक की. मध्यमग्राम के टीएमसी विधायक रथिन घोष भी ऋतब्रत के पक्ष में हस्ताक्षर करके बैठक से बाहर निकले.
पार्टी के दो-तिहाई विधायक उनके साथ
विधानसभा में प्रवेश करने से पहले विधायक चंद्रनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मान लिया है. वहीं सबीना यास्मिन ने बताया कि वे सभी मिलकर नए नेता का चयन करने के लिए बैठक कर रहे हैं. दूसरी तरफ, विधायक संदीपन साहा ने दावा किया कि पार्टी के दो-तिहाई विधायक उनके साथ हैं, जो दल-बदल कानून से बचने के लिए एक जरूरी आंकड़ा है.
नेतृत्व पर कब्जे की जंग
पार्टी पर नियंत्रण को लेकर दोनों गुटों में खींचतान तेज हो गई है. एक तरफ जहां बागी गुट खुद को असली टीएमसी बताते हुए विपक्ष के दर्जे की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी का खेमा पार्टी को बचाने में जुटा है. इससे पहले मंगलवार को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता घोषित करने के लिए स्पीकर रथींद्रनाथ बसु को पत्र भेजा था, लेकिन स्पीकर के कोलकाता में न होने के कारण वह पत्र स्वीकार नहीं हो सका.
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बयानों में उलझा सस्पेंस
इस पूरे घटनाक्रम के बीच खुद ऋतब्रत बनर्जी के बयानों ने सस्पेंस बढ़ा दिया है। एक तरफ जहां उनके समर्थक उन्हें आगे कर रहे हैं, वहीं विधानसभा पहुंचे ऋतब्रत ने इसे महज एक अफवाह बताया. उन्होंने कहा कि वह केवल काम के सिलसिले में वहां आए हैं और विधायकों की संख्या को लेकर उन्होंने कहा कि वह सिर्फ अपनी और संदीपन की जिम्मेदारी ले सकते हैं. अब देखना यह होगा कि पार्टी की कमान ममता बनर्जी के हाथ में रहती है या बागी गुट बाजी मार ले जाता है.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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