रीतब्रत बनर्जी बने बंगाल विधानसभा में नेता विरोधी दल!, तृणमूल के 58 बागी विधायकों का मिला समर्थन

Author Ashish Jha
Updated:
विज्ञापन

ममता बंदोपाध्याय और ऋतब्रत बंदोपाध्याय

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

Ritabrata Bandopadhyay: तृणमूल के बागी विधायकों ने न केवल नेता विरोधी दल का चुनाव कर लिया है, बल्कि बागियों ने विधायक दल की बैठक में मुख्य सचेतक के तौर पर मुर्शिदाबाद के विधायक व पूर्व मंत्री अख्ररुज्जमां को चुन लिया है.

विज्ञापन

कोलकाता से विकास कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

विज्ञापन

Ritabrata Bandopadhyay: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है, जिससे पार्टी के टूटने के कयास तेज हो गए हैं. बुधवार को पार्टी के असंतुष्ट विधायक रीतब्रत बनर्जी 59 विधायकों के समर्थन का पत्र लेकर विधानसभा पहुंचे, जिसके बाद राज्य के सियासी गलियारों में हलचल मच गई है.

समर्थन का पत्र सौंपते विधायक.

बागी विधायकों की बैठक और बड़े दावे

रीतब्रत बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस के कई अन्य प्रमुख विधायक भी एक-एक कर विधानसभा पहुंचने लगे. इनमें अरूप राय, शिउली साहा, अखरुज्जमां, संदीपन साहा, सबीना यास्मिन, चंद्रनाथ सिंह और प्रसून बनर्जी जैसे नाम शामिल हैं. इन बागी विधायकों ने विधानसभा के नौशाद अली कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक की. मध्यमग्राम के टीएमसी विधायक रथिन घोष भी रीतब्रत के पक्ष में हस्ताक्षर करके बैठक से बाहर निकले.

पार्टी के दो-तिहाई विधायक उनके साथ

विधानसभा में प्रवेश करने से पहले विधायक चंद्रनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने रीतब्रत बनर्जी को अपना नेता मान लिया है. वहीं सबीना यास्मिन ने बताया कि वे सभी मिलकर नए नेता का चयन करने के लिए बैठक कर रहे हैं. दूसरी तरफ, विधायक संदीपन साहा ने दावा किया कि पार्टी के दो-तिहाई विधायक उनके साथ हैं, जो दल-बदल कानून से बचने के लिए एक जरूरी आंकड़ा है.

नेतृत्व पर कब्जे की जंग

पार्टी पर नियंत्रण को लेकर दोनों गुटों में खींचतान तेज हो गई है. एक तरफ जहां बागी गुट खुद को असली टीएमसी बताते हुए विपक्ष के दर्जे की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी का खेमा पार्टी को बचाने में जुटा है. इससे पहले मंगलवार को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता घोषित करने के लिए स्पीकर रथींद्रनाथ बसु को पत्र भेजा था, लेकिन स्पीकर के कोलकाता में न होने के कारण वह पत्र स्वीकार नहीं हो सका.

पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

बयानों में उलझा सस्पेंस

इस पूरे घटनाक्रम के बीच खुद रीतब्रत बनर्जी के बयानों ने सस्पेंस बढ़ा दिया है। एक तरफ जहां उनके समर्थक उन्हें आगे कर रहे हैं, वहीं विधानसभा पहुंचे रीतब्रत ने इसे महज एक अफवाह बताया. उन्होंने कहा कि वह केवल काम के सिलसिले में वहां आए हैं और विधायकों की संख्या को लेकर उन्होंने कहा कि वह सिर्फ अपनी और संदीपन की जिम्मेदारी ले सकते हैं. अब देखना यह होगा कि पार्टी की कमान ममता बनर्जी के हाथ में रहती है या बागी गुट बाजी मार ले जाता है.

Also Read: बंगाल में तेज विकास चाहती है भाजपा, विशेष आर्थिक पैकेज देने से फिलहाल बच रहा केंद्र

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola