कर्मियों के प्रमोशन व सुविधाओं में भेदभाव के आरोपों की होगी समीक्षा
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 12 Dec 2024 1:42 AM
कर्मचारियों की शिकायत है कि राज्य सचिवालय में कार्य करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को अधिक सरकारी सुविधाएं मिलती हैं और उनकी पदोन्नति भी जल्द होती है.
मामले में कोर्ट भी गये हैं सरकारी कर्मचारी कोलकाता. राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों व अधिकारियों के बीच भेदभाव होने के आरोपों की जांच के लिए गुरुवार को राज्य सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक होगी, जिसका नेतृत्व वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य करेंगी. कर्मचारियों की शिकायत है कि राज्य सचिवालय में कार्य करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को अधिक सरकारी सुविधाएं मिलती हैं और उनकी पदोन्नति भी जल्द होती है. जबकि, अन्य जगहों पर कार्यरत कर्मचारियों के साथ ऐसा नहीं होता. जानकारी के अनुसार, यह शिकायत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कानों तक पहुंच गयी है. कहा गया है कि नबान्न भवन समेत राज्य के विभिन्न सचिवालय में कार्यरत कर्मियों को हमेशा अतिरिक्त सुविधाएं मिलती रहती हैं. यहां तक कि उन्हें प्रमोशन में भी प्राथमिकता मिलती है. अन्य सरकारी कर्मचारियों के साथ ऐसा क्यों नहीं होना चाहिए? इस शिकायत के समाधान के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर हाइ पावर कमेटी का गठन किया गया है. इस असमानता को कैसे दूर किया जाये, इसका मसौदा तैयार करने के लिए हाइ पावर कमेटी के सदस्य गुरुवार को राज्य सचिवालय में बैठक करेंगे. राज्य सचिवालय के सूत्राें के मुताबिक, चंद्रिमा भट्टाचार्य को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है और समिति के सह अध्यक्ष शिक्षा मंत्री ब्रात्य बोस हैं. इस कमेटी में उनके साथ वित्त और कार्मिक व प्रशासनिक विभाग के अपर सचिव, लोक निर्माण विभाग के संयुक्त सचिव और लोक सेवा आयोग के एक संयुक्त निदेशक को रखा गया है. डीए को लेकर राज्य सरकार के कर्मचारियों में नाराजगी है. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, तो ऐसे में राज्य सरकार कर्मचारियों के बीच प्रमोशन में होने वाले भेदभाव को दूर करना चाहती है. माना जा रहा है कि इससे सरकारी कर्मचारियों के काम को प्रोत्साहन मिलेगा. इस संबंध में राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम लंबे समय से सचिवालय, निदेशालय और क्षेत्रीय कार्यालयों के कर्मचारियों के बीच भेदभाव खत्म करने की मांग कर रहे हैं. इस भेदभाव के मामले को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट में केस भी दायर किया गया है. हमें खुशी है कि राज्य सरकार ने इस संबंध में देर से ही सही, लेकिन कदम उठाया है. हमें उम्मीद है कि नये साल से कर्मचारियों के बीच यह भेदभाव भी दूर हो जायेगा.
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