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यूनियन चुनाव में छात्राओं के लिए 55 फीसदी सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव

Updated at : 26 Jan 2025 12:51 AM (IST)
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यूनियन चुनाव में छात्राओं के लिए 55 फीसदी सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव

विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि यूनियन में 55 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित की जायें. विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि यूनियन में 55 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित की जायें.

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कोलकाता. राज्य उच्च शिक्षा विभाग ने जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) से कहा है कि छात्र संघ चुनाव के लिए तब तक इंतजार करना होगा, जब तक कि परिसर में चुनावों को नियंत्रित करने वाले नियमों में संशोधन की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जाता. विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि यूनियन में 55 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित की जायें. प्रस्ताव को विधि विभाग के पास समीक्षा के लिए भेज दिया गया है. अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय और कॉलेज (छात्र परिषद के चुनाव के लिए संरचना, कार्य और प्रक्रिया) नियम 2017 में इस तरह के आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, फिर भी इस प्रस्ताव पर विचार किया जायेगा. अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो 2017 में तैयार नियमों में संशोधन किया जायेगा. जेयू और अन्य राज्य-सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों में चुनावों के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने और संबंधित नियमों में संशोधन होने के बाद अंतिम निर्णय लिया जायेगा. उच्च शिक्षा विभाग के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि छात्र यूनियन चुनाव में 55 प्रतिशत सीटों का आरक्षण अधिक महिला छात्राओं को कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित करेगा. पहले से ही माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर छात्रों की तुलना में छात्राओं की संख्या अधिक है. कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी छात्राओं की भागीदारी बढ़ रही है. छात्र संघ चुनाव में सीटों के आरक्षण से अधिकाधिक छात्राएं उच्च शिक्षा की ओर आकर्षित होंगी. लड़कियां सशक्त महसूस करेंगी, क्योंकि छात्र यूनियन में आधी से अधिक सीटें उनके लिए आरक्षित होंगी. इसे लेकर विभाग ने जेयू के कार्यवाहक रजिस्ट्रार इंद्रजीत बनर्जी को पत्र लिखकर उच्च शिक्षा विभाग पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों (संरचना, कार्य) के यूनियन चुनाव नियम संशोधन की प्रक्रिया के लिए आवेदन किया. अधिकारी ने बताया कि विभाग आरक्षित श्रेणियों के लिए छात्र संघ में सीटें आरक्षित करने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रहा है. उच्च शिक्षा विभाग ने कैंपस चुनावों को द्विवार्षिक बनाने के लिए जून 2017 में पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय और कॉलेज (छात्र परिषद के चुनाव के लिए संरचना, कार्य और प्रक्रिया) नियम लागू किये थे. नियमों के अनुसार, छात्र संगठन प्रचार व मतदान के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के बैनर या प्रतीक का उपयोग नहीं करेंगे. नियमों में यह भी कहा गया है कि कक्षा प्रतिनिधि के पद के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए छात्रों की उपस्थिति कम से कम 60 प्रतिशत होनी चाहिए. फरवरी के अंत तक इसका फैसला लिया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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