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विद्यासागर विवि में आम विषयों की लोकप्रियता घटी

Updated at : 24 Jul 2025 1:50 AM (IST)
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विद्यासागर विवि में आम विषयों की लोकप्रियता घटी

उच्च शिक्षा में बदल गयी हैं विद्यार्थियों की प्राथमिकताएं, रोजगारपरक शिक्षा व पाठ्यक्रमों को मिल रहा है खास तवज्जो

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अब करियर-उन्मुख पाठ्यक्रमों पर जोर

कोलकाता. उच्च शिक्षा में छात्रों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं. अब पारंपरिक विषयों की जगह व्यावसायिक और करियर-उन्मुख पाठ्यक्रमों की मांग बढ़ रही है. इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए विद्यासागर यूनिवर्सिटी ने अपने 56 संबद्ध कॉलेजों में शैक्षणिक ढांचे में व्यापक सुधार की पहल की है. पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर व झाड़ग्राम जिलों में फैले कॉलेजों में बीते कुछ वर्षों से सामान्य विषयों में छात्रों का प्रवेश लगातार घट रहा है. यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के अनुसार, इस साल स्नातक स्तर पर उपलब्ध 74,000 सीटों में से केवल 26,000 सीटों पर ही आवेदन आये हैं. शेष 48,000 सीटें खाली रह जाने की संभावना है, जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने ‘शैक्षणिक संकट’ करार दिया है. इस स्थिति से निबटने के लिए कुलपति प्रो दीपक कर की अध्यक्षता में एक आपात बैठक हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि कम रुचि वाले पारंपरिक पाठ्यक्रमों की सीटों में कटौती की जायेगी और उनकी जगह रोजगारोन्मुखी और व्यावहारिक कोर्स शुरू किये जायेंगे.

इन पाठ्यक्रमों में अरोमाथेरेपी कला, मत्स्य विज्ञान, मोबाइल रिपेयरिंग, ब्यूटी केयर जैसे विषय प्रमुख होंगे.

छात्रों की बदलती समझ और रोजगार की प्राथमिकता

यूनिवर्सिटी अधिकारियों का कहना है कि आज के छात्र केवल डिग्री नहीं, बल्कि सीधे रोजगार से जुड़ने वाले कौशल सीखना चाहते हैं. देबरा कॉलेज और मुगबेरिया गंगाधर कॉलेज जैसे संस्थानों में पहले से ही इस तरह के कोर्स लोकप्रिय हो चुके हैं.बैठक में उपस्थित योगदा सत्संग पालपाड़ा महाविद्यालय के प्रोफेसर सुमन मंडल ने ब्यूटीशियन प्रशिक्षण शुरू करने का सुझाव दिया, जिस पर कुलपति ने अरोमाथेरेपी जैसे पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता देने की बात कही.

राज्य स्तरीय परीक्षा स्थगन और छात्रों में निराशा

विशेषज्ञों की राय में राज्य में स्कूल सर्विस कमीशन जैसी परीक्षाओं के लगातार विलंबित होने से सामान्य ऑनर्स या बीएड डिग्रीधारी छात्र अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं, निराश हैं. ऐसे में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर उनका रुझान स्वाभाविक है.

शिक्षकों की कमी बनी हुई है चुनौती

हालांकि मत्स्य विज्ञान जैसे नये विषयों के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी एक चुनौती है, लेकिन प्रारंभिक चरण में वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान विभागों के प्रोफेसरों की मदद से कोर्स शुरू किए जायेंगे. साथ ही, भविष्य में विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति भी की जायेगी.

अगले कदम व दिशानिर्देश

यूनिवर्सिटी ने सभी संबद्ध कॉलेजों को 2023 से 2025 तक के प्रवेश आंकड़े भेजने को कहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि किन विषयों में सीटें कम करनी हैं या कोर्स बंद करना है. साथ ही प्रत्येक कॉलेज को वर्क-ओरियेंटेड कोर्स शुरू करने की प्रक्रिया, संभावित चुनौतियों और समाधान संबंधी दिशानिर्देश भी भेजे जायेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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