महुआ के मामले में पुलिस अति सक्रिय, कोर्ट ने पूछा सवाल

एफआइआर दर्ज होने के बाद ऋषि कुमार बागड़ी ने गिरफ्तारी से बचने और एफआइआर रद्द करने की मांग करते हुए हाइकोर्ट में याचिका दायर की.
ई-मेल से दर्ज एफआइआर पर उठे प्रश्न, 23 तक आरोपियों को गिरफ्तारी से राहत
कोलकाता. महुआ मोइत्रा की शिकायत पर राज्य पुलिस द्वारा की गयी कार्रवाई को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट ने सवाल उठाये हैं. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने संबंधित एफआइआर की वैधता पर प्रश्न चिह्न लगाया और आरोपियों को 23 फरवरी तक रक्षाकवच (अंतरिम राहत) प्रदान किया. अदालत ने स्पष्ट किया कि तब तक पुलिस कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी. मामला सोशल मीडिया पर सांसद से जुड़ी कथित विवादित तस्वीरों और टिप्पणियों के प्रसार से जुड़ा है. बताया गया है कि दिल्ली के नोएडा निवासी ऋषि कुमार बागड़ी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर महुआ मोइत्रा से संबंधित एक चैट साझा की थी. इसके बाद सांसद ने दिल्ली से नदिया जिले के एक थाने में ईमेल के माध्यम से शिकायत दर्ज करायी थी. एफआइआर दर्ज होने के बाद ऋषि कुमार बागड़ी ने गिरफ्तारी से बचने और एफआइआर रद्द करने की मांग करते हुए हाइकोर्ट में याचिका दायर की. याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से की गयी शिकायत के मामले में शिकायतकर्ता को 72 घंटे के भीतर संबंधित थाने में उपस्थित होकर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं हुआ. उन्होंने यह भी दावा किया कि एफआइआर पर शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर नहीं हैं और केवल ईमेल के आधार पर मामला दर्ज किया गया. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि शिकायत दर्ज होते ही पुलिस ने नोएडा स्थित आरोपी के घर पर छापेमारी की, जो कानूनी प्रक्रिया के विपरीत है. सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने राज्य के सरकारी वकील से विस्तृत जानकारी मांगी. सरकारी पक्ष ने जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की. मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को निर्धारित की गयी है.
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