आरजी कर कांड : मृत चिकित्सक के माता पिता ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ली याचिका

Updated at : 30 Jan 2025 1:27 AM (IST)
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आरजी कर कांड : मृत चिकित्सक के माता पिता ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ली याचिका

आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रशिक्षु महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले में पीड़िता के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले ली है.

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नये सिरे से दायर करेंगे अर्जी, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी

संवाददाता, कोलकातामहानगर के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रशिक्षु महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले में पीड़िता के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले ली है. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई. याचिका में पीड़िता के माता-पिता ने मामले की नये सिरे से जांच की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित परिवार को फिर से अर्जी दाखिल करने की इजाजत दी. सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित परिवार के वकील से पूछा कि क्या कोर्ट को इस मामले में आगे बढ़ना चाहिए या नहीं, क्योंकि इसी तरह की याचिका हाइकोर्ट में दायर की गयी है. प्रदर्शनकारी चिकित्सकों की अनुपस्थिति विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर होनी चाहिए: कोर्ट दूसरी तरफ, उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली सहित विभिन्न अस्पतालों को उन डॉक्टरों की अनधिकृत अनुपस्थिति को नियमित करने का निर्देश दिया, जो कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में एक प्रशिक्षु महिला चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के विरोध में हुए प्रदर्शनों का हिस्सा थे.

प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने चिकित्सकों के एक संगठन की इस दलील का संज्ञान लिया कि कुछ अस्पतालों ने शीर्ष अदालत के 22 अगस्त 2024 के आदेश के बाद डॉक्टरों की अनुपस्थिति को नियमित कर दिया था, लेकिन दिल्ली एम्स सहित कुछ अस्पतालों ने अनुपस्थिति की अवधि को छुट्टी के रूप में मानने का फैसला किया. प्रधान न्यायाधीश ने कहा: हम यह स्पष्ट करना उचित समझते हैं कि अगर विरोध करने वाले चिकित्सक उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद काम पर लौट गये थे, तो उनकी गैर-हाजिरी को नियमित किया जायेगा और इसे ड्यूटी से अनुपस्थिति नहीं माना जायेगा. यह आदेश मामलों के विशिष्ट तथ्यों एवं परिस्थितियों के मद्देनजर जारी किया गया है और इससे कोई मिसाल नहीं कायम की जा रही है.

चिकित्सकों के संगठन की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि विरोध अवधि को छुट्टी मानने का फैसला स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम के कुछ छात्रों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अस्पताल शीर्ष अदालत के निर्देशों का पालन करेंगे. तुषार मेहता ने कहा कि एम्स, दिल्ली ने विरोध अवधि में डॉक्टरों की अनुपस्थिति को उनके द्वारा ली गयी छुट्टी के रूप में मानने का फैसला किया है.

क्या कहा अदालत ने

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को सतर्क करते हुए कहा कि वे कोर्ट में दिये गये हलफनामे में सावधानी बरतें, क्योंकि इस मामले में संजय राय के खिलाफ पहले ही सजा का आदेश दिया जा चुका है. इसके बाद पीड़ित परिवार के वकील ने याचिका को वापस ले लिया. अब पीड़ित परिवार की ओर से नये सिरे से याचिका दायर की जायेगी. प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी से कहा कि आपकी अर्जी में जो कुछ है, उसमें बहुत सी बातें हैं, जो बहस का विषय है. जिस पर करुणा नंदी ने कहा कि हमें इसकी जानकारी है, कृपया समय चूक को देखें, आरोपी सत्ता में बैठे लोग हैं.

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