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अब सिर्फ बांग्ला में ही सवाल-जवाब

Updated at : 26 Jul 2025 1:57 AM (IST)
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अब सिर्फ बांग्ला में ही सवाल-जवाब

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के भाषा आंदोलन के आह्वान के बीच कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने बड़ा फैसला लिया है.

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केएमसी. अधिवेशन व बैठक में हिंदी-अंग्रेजी सहित अन्य भाषाओं की इजाजत नहीं

चेयरपर्सन ने जारी किया निर्देश

संवाददाता, कोलकातातृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के भाषा आंदोलन के आह्वान के बीच कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने बड़ा फैसला लिया है. निगम के मासिक अधिवेशन या किसी भी बैठक में अब पार्षद अंग्रेजी-हिंदी या अन्य किसी भाषा में प्रश्न नहीं पूछ सकेंगे. अब सिर्फ उन्हें बांग्ला भाषा में ही सवाल-जवाब करना होगा. यह आदेश कोलकाता नगर निगम की चेयरपर्सन माला राय ने दिया है. बताया जा रहा है कि यह आदेश बांग्ला भाषा को प्राथमिकता और महत्व देने के लिए है. राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने दूसरे राज्यों में बांग्ला भाषियों पर उत्पीड़न के आरोप लगाये हैं. ममता बनर्जी ने बांग्ला भाषा को हथियार बनाकर 21 जुलाई की सभा से भाषा आंदोलन का आह्वान किया है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी बीते दिनों तृणमूल की शहीद दिवस रैली से घोषणा की थी कि वह संसद में अब बांग्ला में ही बोलेंगे. ऐसे में पार्षदों को केएमसी के अधिवेशन में बांग्ला में प्रश्न व प्रस्ताव रखने का निर्देश दिया गया है. चेयरपर्सन ने इस संबंध में शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि दूसरे राज्यों में जिस तरह से बंगाली भाषियों को परेशान किया जा रहा है और बांग्ला भाषा के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है, उसके विरोध में यह फैसला लिया गया है. उन्होंने कहा : निगम के सत्रों में ज्यादातर सवाल बांग्ला में पूछे जाते हैं. कुछ मामलों में पार्षद हिंदी और अंग्रेजी में भी सवाल पूछते हैं. यह निर्देश इसलिए दिया गया है ताकि सभी सवाल बांग्ला में ही पूछेंगे और मेयर फिरहाद हकीम भी बांग्ला में ही जवाब देंगे. बता दें कि निगम में कुछ ऐसे भी पार्षद हैं, जो अच्छी तरह से बांग्ला नहीं बोल पाते हैं. उनका क्या होगा? इस बारे में माला राय ने कहा : जो लोग लंबे समय से कोलकाता या बंगाल में रह रहे हैं, वे बांग्ला समझते हैं, क्योंकि, उन्हें अपने मतदाताओं की बात सुननी होती है. ऐसे पार्षद बांग्ला भी बोल सकते हैं. कुछ नहीं बोलेंगे. सत्र कक्ष में बांग्ला में ही कामकाज होगा. उन्होंने उम्मीद जतायी कि आनेवाले दिनों में विधानसभा में भी ऐसा फैसला लिया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH KUMAR SINGH

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