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देबांग्शु के पोस्ट से फिर तृणमूल में ‘नवीन व प्रवीण’ के मुद्दे को मिली हवा

Updated at : 22 Dec 2024 9:09 PM (IST)
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देबांग्शु के पोस्ट से फिर तृणमूल में ‘नवीन व प्रवीण’ के मुद्दे को मिली हवा

तृणमूल नेताओं के वर्ग ने आरोप लगाया गया है कि भट्टाचार्य ने अपने पोस्ट के जरिये पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक वर्ग को निशाना बनाया है.

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कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस आइटी सेल के प्रभारी देबांग्शु भट्टाचार्य द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की गयी एक कविता को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर जैसे फिर ‘नवीन व प्रवीण’ के मुद्दे को हवा दे दी है. तृणमूल नेताओं के वर्ग ने आरोप लगाया गया है कि भट्टाचार्य ने अपने पोस्ट के जरिये पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक वर्ग को निशाना बनाया है. उक्त मामले को लेकर पार्टी के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने टिप्पणी की है. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में व्यंग्यात्मक तरीके से कहा : ‘चींटी’ व ‘तिलचट्टे’ की क्षमता और उनके भय के विषय को बताया. उन्होंने कहा कि “आपलोगों को पता होगा कि तिलचट्टे ‘हवाई चप्पल’ से भयभीत रहते हैं. वह (देबांग्शु) ऐसा भी लिख सकते थे. चींटियां तिलचट्टे को खींच सकती हैं और तिलचट्टे को ‘हवाई चप्पलों’ से डर लगता है. मुझे लगता है कि वह अच्छा लिखते हैं, अच्छी तुकबंदी कर सकते हैं. हालांकि, यह भी सही है कि छोटे होने के बावजूद चींटियां मेहनती और मजबूत भी होती हैं. एक लाल चींटी का काटना ही काफी है. चींटी का काटना दर्दनाक होता है और चींटियां ही तिलचट्टों को भी सही दिशा में ले जाती हैं. यह भी सच है कि तिलचट्टे की दवा ‘कीटनाशक स्प्रे’ से भी ज्यादा असरदार हवाई चप्पल है. गत शनिवार को तृणमूल नेता भट्टाचार्य ने सोशल मीडिया पर एक कविता पोस्ट की. उन्होंने लिखा : वे हंस रहे हैं, मजाक में कह रहे हैं देखो बड़ों के साथ छोटे लड़ाई करेंगे. चींटिया समझकर आप जिन्हें छोटा समझ रहे हैं, असल में वे ही बड़ों के एक वर्ग का बोझ (दायित्व संभाल) उठा रहे हैं. उक्त पोस्ट के बाद ही तृणमूल के प्रवीण नेताओं के वर्ग ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर ऐसा पोस्ट करके प्रवीण नेताओं के वर्ग को निशाना बनाया गया है. हालांकि, पोस्ट को लेकर चर्चा शुरू होते ही भट्टाचार्य ने अपनी कविता को संपादित किया और पोस्ट के नीचे एक पंक्ति लिखी. उन्होंने लिखा : यह कविता इस साल हुए लोकसभा चुनाव से पहले लिखी गयी थी. राजनीति के पंडितों का कहना है कि सवाल उठना लाजमी है कि अगर यह कविता यदि लोकसभा चुनाव से पहले लिखी गयी थी, तो इसे अब अचानक पोस्ट क्यों किया गया? खासकर जब तृणमूल नेतृत्व ‘पार्टी विरोधी और अनुशासन का उल्लंघन’ के आरोप में नयी पीढ़ी के कई नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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