ePaper

भाषाई तकरार भड़काने की कोशिश में ममता : मालवीय

Updated at : 05 Aug 2025 1:39 AM (IST)
विज्ञापन
भाषाई तकरार भड़काने की कोशिश में ममता : मालवीय

उन्होंने कहा कि ममता 'बांग्ला बनाम बांग्लादेशी' को लेकर झूठा नैरेटिव गढ़कर राज्य में भाषा के नाम पर टकराव भड़काने की कोशिश कर रहीं हैं.

विज्ञापन

कोलकाता. भाजपा की सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ के प्रमुख और बंगाल मामलों के सह प्रभारी अमित मालवीय ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाये हैं. उन्होंने कहा कि ममता ””बांग्ला बनाम बांग्लादेशी”” को लेकर झूठा नैरेटिव गढ़कर राज्य में भाषा के नाम पर टकराव भड़काने की कोशिश कर रहीं हैं. अमित मालवीय की यह प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे व तृणमूल के महासचिव अभिषेक बनर्जी के सोशल मीडिया बयानों के बाद सामने आयी. रविवार शाम दोनों नेताओं ने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने एक पत्र में बांग्ला को ””बांग्लादेशी भाषा”” बताया है. इसी के जवाब में मालवीय ने सोमवार सुबह एक लंबा सोशल मीडिया बयान जारी कर ममता पर तीखा पलटवार किया. मालवीय ने कहा कि ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया पूरी तरह से भ्रामक और खतरनाक है. उन्होंने लिखा, दिल्ली पुलिस के पत्र में कहीं भी बांग्ला या बंगाली को ””बांग्लादेशी भाषा”” नहीं कहा गया है. ऐसा दावा करना और बंगालियों से केंद्र सरकार के खिलाफ खड़े होने का आह्वान करना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है. ममता बनर्जी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. भाजपा नेता ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने ””बांग्लादेशी भाषा”” शब्द का इस्तेमाल उन घुसपैठियों की पहचान के संदर्भ में किया है, जो एक खास तरह की बोली और उच्चारण में बात करते हैं, जो भारतीय बंगालियों द्वारा बोली जाने वाली बांग्ला से भिन्न होती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई भाषायी टिप्पणी नहीं बल्कि केवल अवैध प्रवासियों की भाषा विशेषताओं की पहचान के लिए प्रयुक्त शब्द है. मालवीय ने यह भी जोड़ा कि बांग्लादेश में बोली जाने वाली बांग्ला ध्वन्यात्मक रूप से अलग है और उसमें सिलहटी जैसे उपभाषाएं शामिल हैं, जिन्हें भारतीय बंगाली सहज रूप से नहीं समझ पाते. मालवीय ने यह तर्क भी दिया कि ””बंगाली”” शब्द एकरूप भाषा नहीं बल्कि जातीय पहचान को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि भाषा के नाम पर राजनीतिक भ्रम फैलाना एक खतरनाक रणनीति है, जो राज्य को अस्थिर करने की दिशा में ले जा सकती है. भाजपा नेता ने ममता बनर्जी की साहित्यिक समझ पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि आनंदमठ उस दौर की बांग्ला में लिखा गया था. वंदे मातरम संस्कृत में रचा गया और बाद में उपन्यास में जोड़ा गया. जन गण मन भी संस्कृतनिष्ठ बांग्ला में लिखा गया था. ये सारी भाषाई बारीकियां ममता बनर्जी की समझ से बाहर हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
GANESH MAHTO

लेखक के बारे में

By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola