भवानीपुर में वोटर लिस्ट से 40 फीसदी मुस्लिम गायब, गुजराती वोट बैंक भी नाराज, ‘गढ़’ बचा पायेंगी ममता बनर्जी?

Published by :Mithilesh Jha
Published at :16 Apr 2026 6:07 PM (IST)
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Mamata Banerjee Bhabanipur Seat 2026 West Bengal Election

Mamata Banerjee Bhabanipur Seat 2026: भवानीपुर विधानसभा चुनाव 2026 में ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर मिल सकती है. वोटर लिस्ट से 40 फीसदी मुस्लिम नामों की कटौती और महुआ मोईत्रा के बयान से नाराज गुजराती वोटर्स ने समीकरण बदल दिये हैं.

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Mamata Banerjee Bhabanipur Seat 2026: दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 159) सीट को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित किला माना जाता है. 2021 के उपचुनाव में उन्होंने यहां 58,832 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की थी. विधानसभा चुनाव 2026 की दहलीज पर खड़ी ममता बनर्जी के लिए इस बार राह आसान नहीं दिख रही. इसके दो बड़े कारण हैं- मुस्लिम वोट बैंक में बड़ी कटौती और गुजराती समुदाय की नाराजगी. इन दोनों कारणों से मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है.

मुस्लिम वोट बैंक पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’?

भवानीपुर में लगभग 20 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं. ये 2011 से ही टीएमसी का एकमुश्त वोट बैंक रहे हैं. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे गये हैं, जिससे टीएमसी की चिंता बढ़ गयी है. कोलकाता की सबर इंस्टीट्यूट के मुताबिक, भवानीपुर सीट से रिकॉर्ड 40.1 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिये गये हैं. इसके अलावा 22.7 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स को ASDD (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट) श्रेणी में डाल दिया गया है.

Mamata Banerjee Bhabanipur Seat 2026: TMC को सीधा नुकसान

हालांकि, गैर-मुस्लिमों के नाम भी वोटर लिस्ट से हटाये गये हैं, लेकिन वे विभिन्न पार्टियों (भाजपा, लेफ्ट, टीएमसी) में बंटे हुए हैं. मुस्लिम वोट चूंकि सिर्फ टीएमसी के थे, इसलिए इस कटौती का सीधा और बड़ा झटका ममता बनर्जी को ही लगेगा.

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महुआ मोईत्रा के बयान से ‘गुजराती’ वोट बैंक नाराज

भवानीपुर में लगभग 40 प्रतिशत गैर-बंगाली मतदाता हैं. इनमें गुजराती, मारवाड़ी, सिख और बिहारी शामिल हैं. परंपरागत रूप से भाजपा समर्थक होने के बावजूद यहां के गुजराती और मारवाड़ी समुदाय ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे हैं. हाल ही में महुआ मोईत्रा के एक बयान ने इस बार खेल बिगाड़ दिया है.

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क्या था महुआ मोईत्रा का विवादित बयान

महुआ मोइत्रा ने आजादी की लड़ाई का जिक्र करते हुए गुजरातियों के योगदान पर सवाल उठाये और सावरकर पर तंज कसा. भाजपा ने इस बयान को ‘गुजराती अस्मिता’ का अपमान बताते हुए इसे घर-घर पहुंचा दिया है. विशेषकर वार्ड नंबर 70 और 72 में, जहां गुजराती आबादी अधिक है, वहां नाराजगी सा देखी जा रही है.

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डैमेज कंट्रोल के लिए ममता बनर्जी ने खुद मांगी माफी

डैमेज कंट्रोल के लिए ममता बनर्जी ने गुजराती समाज से खुद माफी मांगी. उन्होंने महुआ मोईत्रा को फटकार भी लगायी, लेकिन चुनावी जानकारों का कहना है कि यह ‘घाव’ इतनी जल्दी भरने वाला नहीं है.

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रिकॉर्ड जीत बनाम कड़ी चुनौती

ममता बनर्जी ने वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में 54,213 और पिछले उपचुनाव में करीब 59 हजार वोटों से जीत हासिल की थी. इस बार एक तरफ उनका सबसे मजबूत वोट बैंक (मुस्लिम) तकनीकी वजहों से कम हो गया है, तो दूसरी तरफ उनकी पुरानी सहयोगी ‘गैर-बंगाली’ जनता अपमान के नाम पर बिदक गयी है. भाजपा अब 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले इस ‘नाराजगी’ को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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