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पार्ट टाइम नेता, फुल टाइम ‘तोलाबाज’ के रैंप पर अब नहीं दिखते ‘जीवित भूत’, बोले बंगाल बीजेपी के नेता शंकर घोष

20 Jan, 2026 4:32 pm
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टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी और भाजपा विधायक डॉ शंकर घोष.

एसआईआर के मुद्दे पर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी एक दूसरे पर हमला बोल रही है. बीजेपी के नेता डॉ शंकर घोष ने बंगाल चुनाव 2026 से पहले टीएमसी के नेशनल जेनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी का नाम लिये बगैर उन्हें पार्ट टाइम पॉलिटिकल लीडर और फुल टाइम तोलाबाज (वसूली करने वाला) कहा है. डॉ घोष ने कहा है कि टीएमसी जान-बूझकर एसआईआर सेंटर पर हिंसा करवा रही है.

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले जारी वोटर लिस्ट स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) पर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) एक-दूसरे के खिलाफ लगातार हमला बोल रही है. एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दावा किया था कि कोर्ट में उनकी पार्टी की जीत हुई है. उनके इस बयान पर सिलीगुड़ी के भाजपा विधायक डॉ शंकर घोष ने पलटवार किया. उन्होंने अभिषेक बनर्जी का नाम लिये बगैर कहा कि बंगाल के पार्ट टाइम नेता और फुल टाइम ‘तोलाबाज’ के रैंप पर अब ‘जीवित भूत’ नहीं दिखाई देते.

तोलाबाज के रैंप से गायब हो गये हैं ‘जीवित भूत’ – डॉ घोष

पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के चीफ ह्विप डॉ शंकर घोष ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान राजनीति में बंगाल में एक पार्ट टाइम राजनेता और फुल टाइम तोलाबाज (वसूली करने वाला) लगातार जनसभाएं कर रहे हैं. वे अपनी जनसभाओं में कुछ दिन पहले तक जीवित भूतों को रैंप पर उतारते थे. पिछले कुछ दिनों से वैसे ‘जीवित भूत’ अब रैंप से गायब हो गये हैं.

डॉ घोष ने की थी जीवित वोटर को मृत घोषित करने वाले बीएलओ को रैंप पर लगाने की मांग

डॉ शंकर घोष ने कहा कि जब रैंप पर ‘जीवित भूत’ घूमने लगे थे, तो उन्होंने (भाजपा विधायक घोष ने) कहा था कि टीएमसी के नेता जिन ‘जीवित भूतों’ के साथ मंच पर आते हैं, उसी मंच पर उन बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) को भी लाया जाना चाहिए, जिन्होंने उन जीवित लोगों को मृत घोषित किया है. इसके बाद से जीवित भूतों की कहानी का शोर कम हो गया है.

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एसआईआर न होता, तो वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों का पता ही नहीं चलता – डॉ शंकर घोष

भाजपा विधायक ने कहा कि अगर एसआईआर नहीं होता, तो यह पता ही नहीं चल पाता कि वोटर लिस्ट में किस-किस तरह की गड़बड़ियां हुईं हैं. उन्होंने एक कॉल रिकॉर्ड सुनाया, जिसमें एक व्यक्ति कह रहा है कि उसके 2 भाई हैं. जब वे एसआईआर की प्रक्रिया में सुनवाई के लिए पहुंचे, तो पता चला कि उसके 8 भाई हैं. यानी गलत तरीके से 6 लोगों को वोटर बना दिया गया था.

एसआईआर हियरिंग सेंटर पर हिंसा टीएमसी की राजनीतिक सोच – बीजेपी विधायक

डॉ शंकर घोष ने आरोप लगाया कि एसआईआर हियरिंग सेंटर पर जो तांडव हो रहे हैं, उसका एकमात्र उद्देश्य इन गलत जानकारियों के खुलासा को रोकना है. टीएमसी चाहती है कि जिन लोगों को गलत तरीके से वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है, वे उसमें बने रहें, ताकि पार्टी को इसका लाभ मिलता रहे. इसलिए पहले उन्होंने एसआईआर की प्रक्रिया बंद करने की मांग की. जब इसमें वह सफल नहीं हुई, तो एसआईआर हियरिंग सेंटर्स पर हंगामा और हिंसा करके लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर रही है.

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश बंगाल की जनता की जीत – डॉ घोष

उन्होंने कहा कि यह सब तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक सोच है. उन्होंने कहा कि इसलिए भाजपा कह रही है कि जब तक एसआईआर नहीं, तब तक वोट नहीं. यानी जब तक एसआईआर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक बंगाल में चुनाव नहीं कराये जायें. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर हियरिंग के दौरान सुनवाई केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश दिये हैं. यह बंगाल की जनता की जीत है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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