कपिल सिब्बल बीमार, IPAC पर ED रेड केस की सुनवाई अब 18 फरवरी को

Updated at : 10 Feb 2026 3:39 PM (IST)
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Kapil Sibal Ill Supreme Court Deferred Hearing of ED Raid Case on IPAC

सुप्रीम कोर्ट.

राजनीतिक दलों को परामर्श देने वाली कंपनी आई-पैक के कोलकाता के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रेड मामले की सुनवाई मंगलवार को टल गयी. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के बीमार पड़ने की वजह से ऐसा किया गया है. सुनवाई की अगली तारीख तय करने से पहले कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इसकी सहमति ली.

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पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े एक केस की सुनवाई मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने टाल दी. आई-पैक (Indian Political Action Committee) की छापेमारी विवाद पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दाखिल याचिका पर अब 18 फरवरी को सुनवाई होगी.

सॉलिसिटर जनरल की सहमति से टली सुनवाई

मंगलवार को जैसे ही यह मामला जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने आया, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की अस्वस्थता की जानकारी दी गयी. इसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की सहमति से कोर्ट ने सुनवाई टाल दी.

मामला क्यों है इतना बड़ा?

ईडी का आरोप है कि कोयला चोरी घोटाले की जांच के दौरान आई-पैक ऑफिस और उसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर रेड के दौरान बंगाल सरकार और पुलिस ने उनके काम को बाधित किया.

ईडी के हैं ये आरोप

  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद तलाशी स्थलों पर पहुंचीं.
  • आई-पैक परिसर से अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले गयीं.
  • जांच को बाधित किया गया, रेड में हस्तक्षेप किया गया.

मामला सेंट्रल एजेंसी के काम में स्टेट के इंटरफेरेंस का

ईडी के आरोप बताते हैं कि सवाल सिर्फ रेड का नहीं, बल्कि केंद्रीय एजेंसी की जांच में राज्य सरकार की दखलंदाजी का है.

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सुप्रीम कोर्ट जता चुका है गंभीर चिंता

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी कड़ा रुख दिखा चुका है. 15 जनवरी को कोर्ट ने कहा था कि ईडी की जांच में मुख्यमंत्री द्वारा कथित ‘इंटरफेरेंस’ का मामला बेहद गंभीर है.

इन लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
  • पश्चिम बंगाल सरकार
  • डीजीपी राजीव कुमार
  • अन्य शीर्ष पुलिस अधिकारी

केंद्रीय एजेंसी के काम में हस्तक्षेप की समीक्षा करेगा कोर्ट

कोर्ट ने 15 जनवरी की सुनवाई में यह भी तय किया था कि वह इस सवाल की समीक्षा करेगा कि क्या किसी गंभीर अपराध की जांच में राज्य की कानून-प्रवर्तन एजेंसियां केंद्रीय एजेंसी के काम में हस्तक्षेप कर सकती हैं?

ED अफसरों के खिलाफ FIR पर सुप्रीम कोर्ट ने लगायी रोक

इस पूरे विवाद के बाद पश्चिम बंगाल में उन ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गयी थी, जिन्होंने 8 जनवरी को आई-पैक ऑफिस और प्रतीक जैन के घर छापेमारी की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने दिये हैं ये आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी अफसरों पर दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी और छापेमारी की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया. बंगाल सरकार और DGP को नोटिस जारी किया. इससे पहले जस्टिस मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, डीजीपी राजीव कुमार और अन्य शीर्ष पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया था.

सीएम की भूमिका की सीबीआई जांच की मांग

ईडी की मांग है कि आई-पैक छापेमारी में जिस तरह मुख्यमंत्री ने राज्य के सर्वोच्च पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पहुंचकर सेंट्रल एजेंसी के काम को बाधित किया, उसकी जांच सीबीआई से करायी जाये.

चुनाव से पहले गरमाता मामला

पूरा मामला ऐसे समय में चल रहा है, जब पश्चिम बंगाल में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में यह केस सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक नैरेटिव भी बन चुका है. अब सबकी नजरें 18 फरवरी पर टिकी हैं, जब तय होगा कि मामला आगे किस दिशा में जायेगा.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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