बंगाल चुनाव 2026: झारग्राम में बूथ पर आ धमका विशालकाय हाथी ‘रामलाल’, ईवीएम छोड़ गजराज को देखने लगे वोटर, देखें Video

Published by :Mithilesh Jha
Published at :23 Apr 2026 10:21 PM (IST)
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Jhargram Election Booth Ramlal Elephant West Bengal Election 2026

मतदान केंद्र पर लगी वोटरों की कतार और बूथ के आसपास घूमता हाथी रामलाल.

Jhargram Election Booth Ramlal Elephant: बंगाल चुनाव 2026 के पहले चरण में झारग्राम के जितुशोल बूथ पर ‘रामलाल’ नाम का हाथी पहुंच गया. इसकी वजह से कुछ देर तक मतदान रुका रहा. वन विभाग के ऐरावत और हुल्ला दल ने हाथी को सुरक्षित निकाला.

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Jhargram Election Booth Ramlal Elephant: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के दौरान जंगलमहल के झारग्राम में एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला. गुरुवार सुबह जब जितुशोल प्राथमिक विद्यालय के मतदान केंद्र पर वोटिंग की प्रक्रिया शुरू ही हुई थी, तभी इलाके का चर्चित हाथी ‘रामलाल’ वहां आ धमका.

‘रामलाल’ को देख स्तब्ध रह गये वोटर

भारी-भरकम ‘रामलाल’ को अपने बीच पाकर न केवल मतदाता स्तब्ध रह गये, बल्कि मतदानकर्मियों की सांसें भी कुछ पल के लिए अटक गयीं. हालांकि, इस दौरान न कोई अफरा-तफरी मची और न ही किसी ने शोर किया, बस कुछ मिनटों के लिए लोकतंत्र की रफ्तार पर ब्रेक लग गया.

बगैर नारे और भीड़ के ‘रामलाल’ का शक्ति प्रदर्शन

सियासी अखाड़े में नेताओं की बयानबाजी और रैलियों के बीच ‘रामलाल’ का आगमन किसी ‘मौन शक्ति प्रदर्शन’ जैसा था. बूथ पर मतदाता धीरे-धीरे जुटने लगे थे, तभी घने जंगलों से निकलकर रामलाल सीधे बूथ के करीब पहुंच गया.

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थम गयी कतार, वन विभाग मुस्तैद

कतार के पास से गुजरते गजराज को देख लोगों ने अपनी जगह थाम ली. सबकी निगाहें ईवीएम छोड़कर इस अप्रत्याशित मेहमान पर टिक गयीं. लोढ़ाशुली रेंज के वन अधिकारियों ने बिना देरी किये मोर्चा संभाला. हाथी को सावधानीपूर्वक सुरक्षित दूरी की ओर मोड़ दिया गया, जिसके बाद मतदान दोबारा सुचारु रूप से शुरू हुआ.

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हाथियों को रोकने के लिए तैनात था ‘ऐरावत’ और ‘हल्ला’ दल

जंगलमहल में इंसानों और वन्यजीवों का संघर्ष पुराना है. इसलिए प्रशासन ने इस चुनौती के लिए पहले से ही विशेष तैयारी कर रखी थी. संवेदनशील क्षेत्रों में हाथियों की निगरानी के लिए त्वरित कार्रवाई दल (QRT) तैनात थे.

वन विभाग ने अपने ‘ऐरावत’ वाहनों को सक्रिय रखा था, ताकि भटके हुए हाथियों को आबादी वाले इलाकों से दूर रखा जा सके. आमतौर पर भीड़ नियंत्रण में जुटने वाले अनुभवी ‘हल्ला’ दलों को इस बार हाथियों को मतदान केंद्रों से दूर रखने की जिम्मेदारी दी गयी थी.

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इलाके के लिए ‘अजनबी’ नहीं रामलाल

ग्रामीणों के मुताबिक, रामलाल झारग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर और बांकुड़ा के जंगलों का नियमित यात्री है. वह अक्सर पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड तक विचरण करता है. ग्रामीण उसे डराने की बजाय धान, फल और सब्जियां देकर उसका स्वागत करते हैं. यही वजह है कि मतदान केंद्र पर उसकी मौजूदगी डरावनी नहीं, कौतूहल भरी रही.

मतदान अपडेट : 3 बजे तक 78.77 प्रतिशत वोट

इस रोचक घटनाक्रम के बीच राज्य की 152 सीटों पर मतदान का उत्साह बरकरार है. दोपहर 3 बजे तक लगभग 78.77 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है. छिटपुट घटनाओं को छोड़कर पहले चरण की चुनावी प्रक्रिया फिलहाल शांतिपूर्ण बनी हुई है. झारग्राम के बूथों पर अब सामान्य स्थिति है और लोग भारी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग करने पहुंच रहे हैं.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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