बेहतर रेल कनेक्टिविटी के लिए सियालदह मंडल में बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव
Updated at : 02 Jan 2026 1:37 AM (IST)
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बढ़ती यात्री मांगों और ट्रेन सेवाओं की बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सियालदह रेलवे मंडल में तेजी से विकास कार्य किये जा रहे हैं.
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यार्ड रीमॉडलिंग, लाइन डबलिंग और अत्याधुनिक सिग्नलिंग से 2030 तक बढ़ती यात्री मांगों को संभालने की तैयारी
संवाददाता, कोलकाता. बढ़ती यात्री मांगों और ट्रेन सेवाओं की बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सियालदह रेलवे मंडल में तेजी से विकास कार्य किये जा रहे हैं. बीते वर्ष मंडल के कई सेक्शनों में अत्याधुनिक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलिंग सिस्टम स्थापित किया गया था. वहीं आने वाले समय में सियालदह मंडल में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव की योजना पर काम चल रहा है. इन योजनाओं के तहत नयी स्टेबलिंग लाइनों का निर्माण, यार्ड रीमॉडलिंग और लाइन डबलिंग जैसी परियोजनाओं के माध्यम से रेल नेटवर्क का आधुनिकीकरण किया जायेगा. सियालदह रेलवे मंडल से मिली जानकारी के अनुसार, जल्द ही कृष्णानगर सिटी, बनगांव, बैरकपुर और डायमंड हार्बर जैसे प्रमुख जंक्शनों पर यार्ड रीमॉडलिंग का कार्य शुरू किया जायेगा. इन स्टेशनों के यार्ड इस तरह से विकसित किए जायेंगे कि वे वर्ष 2030 तक अनुमानित यातायात दबाव को संभालने में सक्षम हों. इसी क्रम में लेक गार्डन-बजबज, बारुईपुर-डायमंड हार्बर, सोनारपुर-कैनिंग और राणाघाट-कृष्णानगर सेक्शन में अत्याधुनिक स्वचालित सिग्नलिंग सिस्टम स्थापित करने की योजना पर भी सियालदह मंडल कार्य कर रहा है. क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने और हाई-फ्रीक्वेंसी उपनगरीय सेवाओं के संचालन को सुचारु बनाने के लिए तीन अहम लाइन क्षमता परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गयी है. इनमें राणाघाट–बनगांव सेक्शन का दोहरीकरण, राणाघाट और कृष्णानगर सिटी के बीच तीसरी लाइन का निर्माण तथा कल्याणी और राणाघाट के बीच तीसरी लाइन का निर्माण शामिल है. सियालदह डिवीजन को बहु-स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा.सियालदह मंडल के डीआरएम राजीव सक्सेना ने बताया कि लाइनों और यार्ड के उन्नयन से मंडल में लंबे समय से चली आ रही परिचालन संबंधी बाधाएं दूर होंगी. उन्होंने कहा कि यार्ड को इस तरह डिजाइन किया गया है, जिससे प्लेटफॉर्म की उपलब्धता बढ़ेगी, इंजन रिवर्सल में होने वाली देरी कम होगी और टर्मिनलों पर भीड़भाड़ से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा.
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