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बंगाल की महिलाओं में पीसीओएस इनफर्टिलिटी का बढ़ रहा खतरा

Updated at : 27 Sep 2025 1:31 AM (IST)
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बंगाल की महिलाओं में पीसीओएस इनफर्टिलिटी का बढ़ रहा खतरा

महिलाओं में पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) के बढ़ते मामलों को देखते हुए नोवा आइवीएफ फर्टिलिटी ने शहर में जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया.

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नोवा आइवीएफ फर्टिलिटी ने जागरूकता सेमिनार में चेताया

संवाददाता, कोलकाता.

महिलाओं में पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) के बढ़ते मामलों को देखते हुए नोवा आइवीएफ फर्टिलिटी ने शहर में जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया. इस मौके पर फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स ने पीसीओएस और इससे जुड़ी इनफर्टिलिटी के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त की. नोवा आइवीएफ फर्टिलिटी के मेडिकल डायरेक्टर डॉ रोहित गुटगुटिया ने कहा कि महिलाओं की फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाले पीसीओएस का जल्द निदान जरूरी है. सही जीवनशैली अपनाकर और समय पर ट्रीटमेंट लेकर बेहतर परिणाम हासिल किये जा सकते हैं. डॉ गुटगुटिया ने बताया कि कई महिलाएं अनियमित माहवारी को नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि यही पीसीओएस का एक प्रमुख लक्षण हो सकता है. उनके अनुसार, इनफर्टिलिटी के इलाज के लिए आने वाली लगभग 30 प्रतिशत महिलाओं में इसका कारण पीसीओएस होता है.

पीसीओएस महिलाओं में ऑव्युलेशन को प्रभावित करता है. इसके कारण एंड्रोजन हार्मोन और इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे अंडे ठीक से विकसित नहीं होते. यह समस्या केवल महानगरों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखी जा रही है, जिसका कारण बदलते आहार और कम शारीरिक गतिविधि माना जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUBODH KUMAR SINGH

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