नहीं रुकी हिंसा, तो बंगाल में रोक देंगे एसआइआर : निर्वाचन आयोग

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दूसरे चरण में हीयरिंग के दौरान सुनवाई केंद्रों में हुड़दंग और तोड़फोड़ की घटनाओं को चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया है.
चेतावनी. सुनवाई केंद्रों में तोड़फोड़ और आगजनी को लेकर चुनाव आयोग सख्त
संवाददाता, कोलकाताविशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दूसरे चरण में हीयरिंग के दौरान सुनवाई केंद्रों में हुड़दंग और तोड़फोड़ की घटनाओं को चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया है. आयोग ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सुनवाई केंद्रों में इसी तरह अशांति का माहौल बना रहा और स्थानीय प्रशासन इसे रोकने में विफल साबित होते रहा, तो आयोग एसआइआर प्रकिया को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने को मजबूर होगा. इसलिए राज्य सरकार सुनवाई केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करे और सुनवाई को सुचारू ढंग से होने दे. बता दें कि, फरक्का, पांडुआ, मगरा, बांकुड़ा, डोमजूर, चाकुलिया सहित राज्य के कई जगहों पर सुनवाई केंद्रों में तोड़फोड़ हुई थी. कुछ जगहों पर तृणमूल विधायक के नेतृत्व में इस वारदात को अंजाम दिया गया था. सुनवाई को बीच में बंद करना पड़ा था. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने यह चेतावनी दी है और इसे लेकर सभी डीइओ को सचेत भी कर दिया गया है.
सुनवाई के लिए नहीं पहुंचे 10% अनमैप्ड वोटर
कोलकाता. एसआइआर के तहत नोटिस मिलने के बावजूद करीब तीन लाख यानी 10 फीसदी अनमैप्ड मतदाता सुनवाई में नहीं पहुंचे. चुनाव आयोग ने इन सभी को सुनवाई के लिए नोटिस भेजा था. मालूम रहे कि, नो-मैपिंग की श्रेणी में करीब 32 लाख वोटरों को नोटिस भेजा गया था. जानकारी के अनुसार, मतदाता ड्राफ्ट सूची में नो-मैपिंग वोटरों की संख्या 31,68,426 थी. इन सभी के नाम 2002 की सूची में नहीं थे. सुनवाई के अंतिम चरण में देखा गया कि 10 फीसदी यानी करीब तीन लाख वोटर सुनवाई के लिए नहीं पहुंचे. नो-मैपिंग के अलावा आयोग ने उन वोटर्स को भी सुनवाई के लिए बुलाया है, जिनमें तार्किक विसंगतियां मिली हैं. एसआइआर के पहले चरण में 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाये गये हैं, जिसमें 24 लाख मृत मतदाता हैं.
24 घंटे बाद भी तृणमूल विधायक पर एफआइआर नहीं
कोलकाता. मुर्शिदाबाद के फरक्का में पिछले दिनों बीडीओ ऑफिस में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की सुनवाई के दौरान तोड़फोड़ की घटना में चुनाव आयोग ने गुरुवार शाम पांच बजे तक डीइओ को इस घटना के मुख्य आरोपी व तृणमूल विधायक मनीरुल इस्लाम के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के लिए कहा था. लेकिन शुक्रवार शाम तक आरोपी विधायक के खिलाफ एफआइआर दर्ज नहीं की गयी थी. वहीं, पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उन्हें अभी तक इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है, इसलिए एफआइआर नहीं दर्ज हुई. एफआइआर में इतनी देर की वजह के बारे में कांग्रेस नेता व पूर्व सांसद अधीर चौधरी ने कहा कि क्या राज्य के अधिकारियों के पास एफआइआर दर्ज करने की क्षमता है? वहीं, तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता जयप्रकाश मजूमदार ने कहा कि अगर लोग एसआइआर का विरोध नहीं करेंगे, तो कौन करेगा? कार्रवाई करने का सवाल ही नहीं उठता है.
इन जिलों में सुनवाई केंद्रों को बनाया गया निशाना
उत्तर दिनाजपुर के इटाहार के मुरालीपुकुर गांव के चंदू सरकार (51) का शव मिलने के बाद बाद अक्रोशित ग्रामीणों ने वहां के एक स्कूल में चल रही एसआइआर की सुनवाई के दौरान हमला कर दिया. दक्षिण 24 परगना के सोनाखाली में एक सरकारी भवन में सुनवाई केंद्र को निशाना बनाया गया. भीड़ ने तोड़फोड़ करते हुए चुनाव अधिकारियों को खदेड़ दिया. मुर्शिदाबाद के फरक्का में ब्लॉक विकास कार्यालय में उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की, जिसमें चुनाव अधिकारी व माइक्रो ऑब्जर्वर जख्मी हो गये. आरोप है कि हमला तृणमूल विधायक मनीरुल इस्लाम के नेतृत्व में हुआ. हुगली के पांडुआ व मगरा में तृणमूल विधायक असित मजूमदार अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और बीएलए को सुनवाई केंद्र के अंदर नहीं जाने देने पर हंगामा किया. उत्तर दिनाजपुर के चाकुलिया में बीडीओ कार्यालय में लोग पहुंच और वहां तोड़फोड़ करने लगे. उपद्रवियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया. दक्षिण 24 परगना के मगराहट में एसआइआर की सुनवाई करने पहुंचे विशेष रोल ऑब्जर्वर सी मुरुगन की गाड़ी पर हमला.सुनवाई केंद्र को भी निशाना बनाया गया.
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