तृणमूल में मुझे वह सम्मान नहीं मिला जिसका मैं हकदार था : हसरत अली

Published by : GANESH MAHTO Updated At : 06 Dec 2025 11:50 PM

विज्ञापन

26 साल बाद छलका दर्द

विज्ञापन

खड़गपुर. दो दिसंबर 1999 की रात आज भी मेरी रगों में सिहरन पैदा कर देती है. मुझे घर से उठा लिया गया और माकपा कार्यकर्ताओं ने मेरे दोनों हाथ काट दिये. यह कहते हुए केशपुर के तृणमूल कार्यकर्ता शेख हसरत अली की आंखों में 26 साल पुराना दर्द फिर ताजा हो उठा. लेकिन इस बार यह दर्द विरोधियों पर नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर था. हसरत अली ने आरोप लगाया कि संघर्ष के दिनों में जिस पार्टी के लिए उन्होंने सब कुछ दांव पर लगा दिया, आज वही पार्टी उन्हें वह सम्मान नहीं दे रही जिसकी वे उम्मीद रखते थे. उन्होंने कहा : हम मुट्ठीभर लोग मोहम्मद रफीक के नेतृत्व में माकपा के अत्याचार के खिलाफ लड़े. दीदी (मुख्यमंत्री) को सब पता है. मैं 11 साल बेघर रहा. मुकुल राय और पंकज बनर्जी ने मुझे कोलकाता में शरण दी. दीदी सभी बैठकों में बुलाती थीं और मेरे कटे हुए हाथ दिखा कर अत्याचारों के बारे में बात करती थीं. मगर लगता है अब वह भी मुझे भूल गयी हैं. केशपुर बाजार से सात किलोमीटर दूर अपने घर के पिछवाड़े खड़े 50 वर्षीय हसरत ने पुराने जख्मों को याद करते हुए कहा : मेरी चार बेटियां हैं, बूढ़ी मां है, पत्नी है. मेरा भाई भी तृणमूल कार्यकर्ता था, उसके दोनों पैर माकपाइयों ने तोड़ दिये थे. लेकिन हमारे परिवार को आज तक कोई मदद नहीं मिली. घर तक नहीं दिया गया. आज भी नेताओं के घर-घर जाकर गुहार लगानी पड़ती है. इस बीच केशपुर की विधायक व राज्य मंत्री शिउली साहा ने कहा : केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बंगाल की जनता भी हसरत अली को जानती है. वे माकपा की क्रूरता के प्रतीक हैं. वह हमारी पार्टी के वरिष्ठ और सक्रिय कार्यकर्ता हैं. तृणमूल हमेशा उनके और उनके परिवार के साथ खड़ी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
GANESH MAHTO

लेखक के बारे में

By GANESH MAHTO

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola