बुजुर्ग दंपती को मिला आवास योजना का पैसा लौटाने का नोटिस
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 12 Jan 2025 1:06 AM
हालांकि अब सात दिन बीते जाने पर गिरफ्तारी के डर से यह वृद्ध दंपती बगीचे में रह रहा है.
गिरफ्तारी के डर से दो दिनों से बगीचे में रह रहा है दंपती कल्याणी. बांग्लार बाड़ी योजना का पैसा मिलने और घर का पहला चरण बनने के बाद प्रशासन की ओर से राशि लौटाने का नोटिस भेजा गया. स्थानीय सामूहिक विकास अधिकारी ने सात दिनों में पैसे लौटाने का आदेश दिया है. हालांकि अब सात दिन बीते जाने पर गिरफ्तारी के डर से यह वृद्ध दंपती बगीचे में रह रहा है. दंपती के अनुसार, सरकारी पैसा मिलने के बाद परिवार ने मकान के लिए नियमानुसार खर्च किया. अब वे पैसे कैसे लौटायेंगे. मामला नदिया जिले के कृष्णागंज के स्वर्णखाली गांव के निवासी रंजीत विश्वास का है. पति-पत्नी बीड़ी मजदूर हैं. रंजीत विश्वास और सुचित्रा विश्वास किसी तरह से अपना गुजारा कर रहे हैं. यह परिवार स्वर्णखाली गांव में दो एकड़ जमीन पर बने टिन के घर में रहता था. उन्हें बांग्लार बाड़ी योजना के तहत घर बनाने के लिए राशि स्वीकृत हुई. उन्होंने उस टिन शेड को चार हजार रुपये में बेच दिया. इस बीच, आवास योजना के तहत 60 हजार रुपये की पहली किस्त मिलने के बाद, उन्होंने रेत, पत्थर और छड़ें खरीदीं और घर बनाना शुरू कर दिया. लेकिन गत वर्ष 31 दिसंबर को कृष्णागंज बीडीओ कार्यालय से वृद्ध दंपती को नोटिस भेजा गया. इसमें कहा गया कि बांग्लार बाड़ी ग्रामीण योजना में घर बनाने के लिए आपको पहले ही 60 हजार रुपये मिल चुके हैं, लेकिन जांच में पता चला है कि आपका घर तैयार होने के बावजूद आपने बांग्लार बाड़ी के लिए आवेदन किया है. आपने जानकारी छिपायी है, इसलिए अगले सात दिनों के अंदर सरकार से मिली 60 हजार रुपये की राशि बीडीओ कार्यालय के खाते में या नकद जमा कर दें, नहीं तो कार्रवाई की जायेगी. डर के मारे परिवार के सदस्यों ने पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए अब बगीचे में शरण ली है. स्थानीय निवासी भी घटना से हैरान हैं. वहीं, बुजुर्ग दंपती ने दावा किया कि उनके साथ ऐसा व्यवहार इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि वे भाजपा समर्थक हैं. जब इस बारे में कृष्णागंज पंचायत समिति की प्रधान काकली दास से पूछा गया तो उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की. वहीं, कृष्णागंज के बीडीओ सौगत साहा ने भी पूछे जाने पर मीडिया के सामने अपना मुंह नहीं खोला.
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