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निजी जांच केंद्र और अस्पताल पर हेल्थ कमीशन ने लगाया जुर्माना

Updated at : 29 Apr 2025 1:06 AM (IST)
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निजी जांच केंद्र और अस्पताल पर हेल्थ कमीशन ने लगाया जुर्माना

एक प्राइवेट कैंसर हॉस्पिटल को इलाज खर्च लौटाने का दिया आदेश

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कोलकाता. वेस्ट बंगाल क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमीशन एक बार फिर अपना डंडा चलाया है. आयोग ने एक निजी जांच केंद्र पर पांच हजार और अस्पताल पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. वहीं टाटा कैंसर अस्पताल को इलाज खर्च लौटाने का निर्देश दिया गया है. यह जानकारी कमीशन के चेयरमैन एवं पूर्व जस्टिस असीम कुमार बनर्जी ने दी. उन्होंने बताया कि सुरक्षा डायग्नोस्टिक सेंटर पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. बताया कि होम्योपैथी डॉक्टर चिरंजीत राय की ओर से शिकायत दर्ज करायी गयी थी. आरोप है कि डॉ राय अपनी पत्नी की रक्त जांच करायी गयी थी, पर रक्त सैंपल देने के बाद हाथ में दर्द हुआ और रक्त जम गया था. इसकी शिकायत किये जाने के बाद भी सुरक्षा की ओर से किसी तरह का स्टेप नहीं लिया गया था. चेयरमैन असीम कुमार बनर्जी ने बताया कि घटना 15 अप्रैल की थी और कमीशन से तीन माार्च शिकायत दर्ज करायी गयी थी. इस मामले में कमीशन ने अपने विशेषज्ञ डॉ मैत्री मुखर्जी से सुझाव भी लिया था. डॉ मुखर्जी का कहना था इस तरह की घटना आम हैं, लेकिन शिकायत किये जाने के बाद भी जांच केंद्र की ओर से मरीज की मदद नहीं की गयी. इस वजह से आयोग ने जांच केंद्र पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. यह राशि मरीज को दिये जाने का निर्देश दिया गया है. वहीं एक अन्य मामले में कमीशन ने श्री रामपुर सर्जिकल पर 10 हजार का जुर्माना लगाया है. इस अस्पताल ने मरीज के परिजन और कमीशन को मृत मरीज से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड नहीं सौंपने की वजह से यह जुर्माना लगाया गया है. वहीं, एक अन्य मामले में मरीज को कोलोन कैंसर की सर्जरी के लिए टाटा कैंसर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पहले उसे साढ़े चार लाख का पैकेज दिया गया था, पर बाद में बिल बढ़ कर साढ़े 22 लाख हो गया. मरीज 62 दिन भर्ती था. इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गयी थी. इस दौरान उसके परिजन को 24 लाख 67 हडार 758 रुपये के बिल थमाया गया. 20 लाख रुपये परिजनों के मेडिक्लेम से भुगतान किया गया था. इसके बाद खर्च का भुगतान पांच लाख रुपये स्वास्थ्य साथी कार्ड से किया गया. 24 दिन स्वास्थ्य साथी कार्ड पर इलाज चला. इसके बाद भी मरीज को 5 लाख 54 हजार 248 रुपये चुकाना पड़ा. परिजन भुगतान नहीं कर पा रहे थे. ऐसे में वे कमीशन के पास पहुंचे. कमीशन ने आयोग ने इलाज के कोताही पायी. इलाज में लापरवाही बतरी गयी थी, जिसके बाद आयोग ने 5 लाख 54 हजार 248 रुपये एक महीने के भीतर लौटाने का निर्देश दिया है. इस राशि को समय पर नहीं लौटाने पर आठ फीसदी ब्याज भी अस्पताल को भरना होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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