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जादवपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में नहीं शामिल हुए राज्यपाल

Updated at : 25 Dec 2024 1:46 AM (IST)
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जादवपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में नहीं शामिल हुए राज्यपाल

राज्यपाल डॉ सीवी आनंद बोस मंगलवार को जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) के दीक्षांत समारोह में शामिल नहीं हुए.

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संवाददाता, कोलकाता

राज्यपाल डॉ सीवी आनंद बोस मंगलवार को जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) के दीक्षांत समारोह में शामिल नहीं हुए. राजभवन ने कहा कि इसके आयोजन में उचित औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया. जादवपुर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ बोस ने सोमवार को कार्यवाहक कुलपति भास्कर गुप्ता को पत्र लिख कर कहा था कि दीक्षांत समारोह कई नियमों और कानूनों का उल्लंघन करते हुए आयोजित किया गया है और यह ‘अवैध’ है.

जेयू की कार्यकारी परिषद में कुलाधिपति द्वारा मनोनीत सदस्य काजी मासूम अख्तर ने दीक्षांत समारोह में भाग लेने के बाद कहा कि राजभवन ‘निराश’ है और राज्यपाल नियमों का पालन नहीं किये जाने से ‘दुखी और अपमानित महसूस कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि स्थायी कुलपति नहीं होने और अनिवार्य ‘कोर्ट मीटिंग’ के लिए कोई पूर्व सूचना न दिये जाने के कारण राज्यपाल दीक्षांत समारोह को अवैध और कदाचार से भरा मानते हैं- जिसकी तिथि कार्यकारी परिषद की बैठक में तय की गयी थी. अख्तर ने कहा कि हालांकि वर्षों से दीक्षांत समारोह की तिथि 24 दिसंबर रही है, लेकिन असाधारण परिस्थितियों में इसे टालने का प्रावधान है. उन्होंने कहा : मैं राज्यपाल से अनुमति लेने के बाद कार्यक्रम में आया हूं.

उन्होंने कहा कि जनसंचार के कुछ छात्रों के आरोप कि उनकी परीक्षा की कॉपियों का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया. इस मुद्दे का भी समारोह से पहले समाधान किया जाना चाहिए था. पिछले साल भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी और तब अंतरिम कुलपति बुद्धदेव साउ को अंततः अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

वहीं, जेयू के कुलपति भास्कर गुप्ता ने संवाददाताओं से कहा कि यह दुखद है कि कुलाधिपति दीक्षांत समारोह में शामिल नहीं हो सके. उन्होंने कहा कि उचित होता, यदि कुलाधिपति मौजूद होते. लेकिन यह उनका निर्णय था. श्री गुप्ता ने दीक्षांत समारोह आयोजित करने में प्रक्रियाओं का पालन नहीं किये जाने के आरोप जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा ईमानदारी और पारदर्शी तरीके से काम करने में विश्वास रखते हैं. राजभवन के आरोप को खारिज करते हुए ‘प्रो-वीसी’ अमिताभ दत्ता ने कहा कि निर्णय लेने वाले विश्वविद्यालय के सर्वोच्च निकाय ‘कोर्ट’ की बैठक आयोजित करने सहित सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और बोस की मंजूरी मांगी गयी. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने कानून का पालन किया. कार्यकारी परिषद सदस्य मनोजीत मंडल ने कहा कि राज्यपाल के कार्यालय को 24 दिसंबर को दीक्षांत समारोह आयोजित करने के निर्णय के बारे में अक्तूबर में सूचित किया गया था और नियमित पत्राचार किया गया था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

अंग्रेजी विभाग के प्रमुख मंडल ने कहा : अचानक एक सप्ताह पहले उन्होंने एक प्रेस नोट जारी करके प्रक्रिया को अवैध बताया. वह केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं और जेयू जैसी संस्था की स्वायत्तता को कमजोर कर रहे हैं. अपने पत्र में राज्यपाल ने कहा था कि ‘कुलपति के गैरकानूनी कदमों’ के कारण अनावश्यक मुकदमेबाजी हो सकती है, जिससे दी गयी डिग्री की वैधता प्रभावित हो सकती है और छात्र समुदाय के हित प्रभावित हो सकते हैं. इसमें कहा गया कि यह ध्यान देने योग्य है कि 17 दिसंबर को जल्दबाजी में कार्यकारी परिषद की बैठक बुलायी गयी थी, जिसमें 24 दिसंबर को दीक्षांत समारोह आयोजित करने की तिथि प्रस्तावित की गयी, जिसे चूक छिपाने के लिए अनुचित जल्दबाजी के तौर पर देखा जा सकता है.

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