बंगाल सरकार के प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप कर रही बाहरी एजेंसी : शुभेंदु

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बंगाल सरकार के प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप कर रही बाहरी एजेंसी : शुभेंदु

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि 2021 के विधानसभा चुनाव से अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के लिए जनसंपर्क रणनीति बनाने वाली एजेंसी अब राज्य सरकार के प्रशासनिक कामकाज में भी हस्तक्षेप कर रही है.

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संवाददाता, कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि 2021 के विधानसभा चुनाव से अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के लिए जनसंपर्क रणनीति बनाने वाली एजेंसी अब राज्य सरकार के प्रशासनिक कामकाज में भी हस्तक्षेप कर रही है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक ईमेल का स्क्रीनशॉट साझा किया, जो कथित तौर पर उक्त एजेंसी के प्रतिनिधि द्वारा राज्य के सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के निदेशक और अतिरिक्त सचिव को भेजा गया था. इस ई-मेल में राज्य सरकार की एक परियोजना ‘आमादेर पाड़ा, आमादेर समाधान’ से जुड़े प्रमुख डिजाइन संसाधनों के ड्राइव लिंक दिये गये थे. श्री अधिकारी का दावा है कि यह सीधा प्रशासनिक दखल है. हालांकि इस स्क्रीनशॉट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासनिक अधिकारियों से पूछे सवाल : श्री अधिकारी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा और पश्चिम बंगाल सिविल सेवा के अधिकारियों से पूछा कि क्या वे इस मामले पर चुप रहेंगे, जबकि एक निजी राजनीतिक परामर्श देने वाली कंपनी के लोग बिना किसी औपचारिक, नैतिक या कानूनी संबंध के सरकारी अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह कानूनी है कि राज्य सरकार रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों में एक कॉर्पोरेट राजनीतिक फर्म को शामिल करे, जबकि वही फर्म सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के चुनाव प्रचार और संगठन को भी संभाल रही है. अधिकारी ने आरोप लगाया कि यह न केवल अवैध दखल है बल्कि संभवतः एक बड़ा वित्तीय घोटाला भी है. शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वह इस ‘अशुद्ध गठजोड़’ को खत्म करने के लिए कानूनी कदम उठायेंगे. शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले बांग्लादेशी मुस्लिम प्रवासियों को बसाने की अनुमति दे चुकी हैं और अब उन्होंने एजेंसी के लोगों को राज्य सरकार की प्रशासनिक सीमाएं लांघने की छूट दे दी है. उन्होंने सवाल उठाया कि एक निजी कंपनी का कर्मचारी किस तरह एक डब्ल्यूबीसीएस अधिकारी को, जो निदेशक स्तर के पद पर है, निर्देश दे सकता है.

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Akhilesh Kumar Singh

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