नेता प्रतिपक्ष का आरोप : 50 हजार रुपये में बिक रहे परीक्षाओं के प्रश्नपत्र

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नेता प्रतिपक्ष का आरोप : 50 हजार रुपये में बिक रहे परीक्षाओं के प्रश्नपत्र

शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार संचालित और सहायता प्राप्त माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए राज्य स्तरीय चयन परीक्षा से पहले शुक्रवार को दावा किया कि उत्तर 24 परगना में एक गिरोह प्रश्न पत्र 50,000 रुपये में बेचा रहा है.

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स्कूल सेवा आयोग ने किया आरोप को खारिज

कोलकाता. भाजपा के नेता और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार संचालित और सहायता प्राप्त माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए सात और 14 सितंबर को आयोजित की जा रही राज्य स्तरीय चयन परीक्षा (एसएलएसटी) से पहले शुक्रवार को दावा किया कि उत्तर 24 परगना में एक गिरोह प्रश्न पत्र 50,000 रुपये में बेचा रहा है.

पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) द्वारा सात और 14 सितंबर को आयोजित की जा रही एसएलएसटी के जरिये कक्षा नौ-10 और 11-12 के 35,726 शिक्षण पद भरे जायेंगे. अधिकारी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि उनके पास सात सितंबर की परीक्षा के प्रश्नपत्र 50,000 रुपये में बेचे जाने की जानकारी है. भाजपा नेता ने दावा किया कि उनके पास इस दावे के समर्थन में एक ऑडियो क्लिप भी है. नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया : जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली इस भ्रष्ट तृणमूल कांग्रेस सरकार को यह एहसास हो गया कि वह पैसे के बदले अयोग्य लोगों को उत्तीर्ण करने में मदद करने के लिए ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकती, तो उन्होंने अब अन्य तरीकों का सहारा लिया है. उन्होंने कहा : एजेंट के माध्यम से प्रश्नपत्र बेचने के प्रयास किये जा रहे हैं. मुझे जानकारी मिली है कि सात सितंबर का प्रश्नपत्र 50,000 रुपये में बेचा जा रहा है. आयोग ने आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि प्रश्नपत्र सुरक्षित हैं. अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर राज्य में भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप देने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यह चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है. शुभेंदु की यह टिप्पणी इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि उच्चतम न्यायालय ने 2016 एसएससी नियुक्ति परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों की करीब 26 हजार शिक्षण व गैर-शिक्षण नौकरियों को अमान्य करार दिया था. कलकत्ता उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय दोनों ने ही पूरी प्रक्रिया को दागदार और दूषित पाया था.

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Akhilesh Kumar Singh

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