लॉकडाउन के दौरान पंडित प्रवीण गोडखिंडी ने बना डाली ‘ऑल्टो बांसुरी’
Author : AmleshNandan Sinha Published by : Prabhat Khabar Updated At : 12 Apr 2020 6:50 PM
कोरोना वायरस महामारी की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन हैं. लोग अपने घर में हैं और कई वर्तमान और भविष्य की चिंता कर डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं, लेकिन प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित प्रवीण गोडखिंडी लॉकडाउन में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में नये तरह की बांसुरी ‘ऑल्टो बांसुरी’ का ही अविष्कार कर डाला है. पंडित गोडखिंडी बताते हैं : मैं जो बांसुरी बजाता हूं. उससे नीचे के स्वर (मंद्र सप्तक) में यह बांसुरी बजती है. यह बांसुरी ‘यू’ शेप में है. लॉकडाउन की वजह में मुझे इस पर काम करने का मौका मिला. मैंने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी डाला है, जिसकी बहुत ही प्रशंसा मिली है.
कोलकाता : कोरोना वायरस महामारी की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन हैं. लोग अपने घर में हैं और कई वर्तमान और भविष्य की चिंता कर डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं, लेकिन प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित प्रवीण गोडखिंडी लॉकडाउन में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में नये तरह की बांसुरी ‘ऑल्टो बांसुरी’ का ही अविष्कार कर डाला है. पंडित गोडखिंडी बताते हैं : मैं जो बांसुरी बजाता हूं. उससे नीचे के स्वर (मंद्र सप्तक) में यह बांसुरी बजती है. यह बांसुरी ‘यू’ शेप में है. लॉकडाउन की वजह में मुझे इस पर काम करने का मौका मिला. मैंने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी डाला है, जिसकी बहुत ही प्रशंसा मिली है.
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उन्होंने कहा : लॉकडाउन की वजह से दो चीज हुई है. हम जैसे कलाकार हरदम घर से बाहर रहते थे. प्रोग्राम के सिलसिले में देश-विदेश घूमते रहते थे. परिवार के साथ समय बिल्कुल नहीं मिलता था. यह मेरे लिए परिवार के साथ समय बिताने का अच्छा ब्रेक मिला है. उन्होंने कहा : लॉकडाउन के दौरान अभी तक की अपनी संगीत की यात्रा की आत्म समीक्षा का मौका मिला है. उसकी आत्म समीक्षा कर रहा हूं. क्या हासिल किया है? और क्या-क्या करना चाहिए? बांसुरी में और क्या नये प्रयोग हो सकते हैं?
उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान ‘ऑल्टो बांसुरी’ इजाद किया है. मेरा 18 वर्षीय लड़का है. वह भी बांसुरी बजाता है. उसके साथ युगलबंदी की ऑनलाइन कंसर्ट जारी है. शास्त्रीय संगीत के नये-नये गाने बना रहा हूं. उसे काफी लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर हिंदुस्तानी संगीत एकदम लुप्तप्राय: हो गया था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से अब फिर सोशल मीडिया पर हिंदुस्तानी संगीत दिखने लगा है. हम लोग उसे पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि घर में बैठकर गाने को कंपोज कर रहे हैं. लॉकडाउन में क्रिएटिव काम कर रहा हूं. प्रार्थना स्वरूप अलग-अलग राग बजा रहा हूं. ऑनलाइन प्लेटफार्म फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्वीटर आदि पर पोस्ट कर रहा हूं, जिससे लोगों को शांति मिले. कोरोना वायरस से जो अशांति और तनाव है. उससे मुक्ति मिले. संगीत और राग को सुनकर उनके मन को शांति मिल सकती है. पूजा और प्रार्थना की तरह राग ‘राम कल्याण’, ‘शुद्ध कल्याण’ व ‘दरबारी कान्हड़ा’ आदि बजा रहा हूं. यह मनोरंजन के लिए नहीं, वरन पूजा भाव से सभी को शांति मिले. चिंता और दु:ख के वातावरण से सभी को मुक्ति मिले.
उन्होंने कहा कि जब आप गौर से इन्हें सुनते हैं, तो मन को शांति मिलती है. बाहर की दुनिया का टेंशन भूल जाते हैं. उन्होंने कहा : प्रधानमंत्री ने कहा है कि लॉकडाउन में लक्ष्मण रेखा का पालन करना है. सभी को पालन करना है. यदि इसका पालन नहीं करेंगे, तो अपना, समाज और पूरे देश का नुकसान हो सकता है. इसे सभी को समझना चाहिए. इसी कारण हम संगीतकार सोशल मीडिया पर एक्टिव है, ताकि ऐसे लोगों को बांध कर रखें.
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अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.
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