सनातन परंपरा की अवहेलना सत्ता के लिए घातक : सच्चित स्वरूप

ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज द्वारा स्थापित कोन्नगर राजराजेश्वरी सेवा मठ के प्रभारी सच्चित स्वरूप महाराज ने प्रयागराज की हालिया घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया है.
हुगली. ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज द्वारा स्थापित कोन्नगर राजराजेश्वरी सेवा मठ के प्रभारी सच्चित स्वरूप महाराज ने प्रयागराज की हालिया घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल संविधान से नहीं, बल्कि जनभावनाओं, आस्थाओं और परंपराओं के संतुलन से संचालित होती है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा हालिया घटनाक्रम इसी संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े करता है. सच्चित स्वरूप महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य केवल एक धार्मिक पद नहीं, बल्कि समाज की नैतिक चेतना और वैचारिक मार्गदर्शन के प्रतीक होते हैं. ऐसे में उनके सम्मान से जुड़ी संवेदनशीलता की अनदेखी जनआस्था को गहरी ठेस पहुंचाती है. प्रयागराज में माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ जो घटना घटी, वह निंदनीय और अमर्यादित है.
सच्चित स्वरूप महाराज ने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संतों का अपमान ऐसे लोग कर रहे हैं, जो स्वयं को हिंदू और सनातन धर्म का रक्षक बताते हैं और गाय व धर्म के नाम पर वोट मांगते हैं. उन्होंने मंदिर प्रशासन की ओर से इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी भर्त्सना की. वहीं, राजराजेश्वरी सेवा मठ के उप प्रभारी श्रीधर द्विवेदी ने कहा कि मठ की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह किया जाता है कि वह इस मामले में शीघ्र संज्ञान ले और पूज्य महाराज से क्षमा मांग कर इस प्रकरण का सम्मानजनक समाधान करे.
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