दक्षिणेश्वर मंदिर निजी संपत्ति या सार्वजनिक, मालिकाना हक पर कलकत्ता हाईकोर्ट में 17 से होगी लगातार सुनवाई

Updated at : 10 Dec 2025 9:03 PM (IST)
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Dakshineshwar Kali Mandir Calcutta High Court

दक्षिणेश्वर काली मंदिर के मालिकाना हक पर कलकत्ता हाईकोर्ट में होगी सुनवाई.

Dakshineshwar Kali Mandir: दक्षिणेश्वर काली मंदिर के खातों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की मांग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआइएल) दायर की गयी थी. मंदिर के पुजारियों और भक्तों ने मंदिर ट्रस्ट के खातों और संपत्ति के रख-रखाव में घोर अनियमितता का आरोप लगाया है. याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि इस वर्ष काली पूजा के अवसर पर मंदिर के अधिकारियों ने बड़ी संख्या में गहने और साड़ियों के दान का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा है.

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Dakshineshwar Kali Mandir| कोलकाता, अमित कुमार दास / अमर शक्ति : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के प्रतिष्ठित दक्षिणेश्वर काली मंदिर के मालिकाना हक पर कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई है. याचिकाकर्ता ने पूछा है कि दक्षिणेश्वर मंदिर किसी की निजी संपत्ति है या सार्वजनिक संपत्ति. दक्षिणेश्वर मंदिर को लेकर पिछले कुछ दशक में कई बार हाईकोर्ट में सवाल उठाये गये हैं. कभी मंदिर के ट्रस्ट के चयन को लेकर, तो कभी मंदिर में आर्थिक भ्रष्टाचार सहित अन्य आरोपों को लेकर मामला किया गया है. इन सभी मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में लंबित है. इन मामलों पर पिछले 2 वर्ष में एक बार भी सुनवाई नहीं हुई है.

कलकत्ता हाईकोर्ट की 2 जजों की बेच करेगी याचिका पर सुनवाई

अब मंदिर के मालिकाना हक पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में नयी याचिका दाखिल की गयी है. दक्षिणेश्वर मंदिर के जुड़े सभी मामलों को सुनवाई के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायाधीश सुप्रतिम भट्टाचार्य की खंडपीठ को भेजा गया है. 17 दिसंबर से इन सभी मामलों पर सुनवाई शुरू होगी. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई के दिन केंद्र और राज्य सरकार को अदालत में बताना होगा कि उनकी ओर से दक्षिणेश्वर मंदिर को कोई आर्थिक अनुदान दिया गया था या नहीं.

मंदिर को मिले दान का ट्रस्ट ने नहीं रखा है कोई हिसाब

इससे पहले दक्षिणेश्वर काली मंदिर के खातों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की मांग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआइएल) दायर की गयी थी. मंदिर के पुजारियों और भक्तों ने मंदिर ट्रस्ट के खातों और संपत्ति के रख-रखाव में घोर अनियमितता का आरोप लगाया है. याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि इस वर्ष काली पूजा के अवसर पर मंदिर के अधिकारियों ने बड़ी संख्या में गहने और साड़ियों के दान का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा है.

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Dakshineshwar Kali Mandir: दक्षिणेश्वर मंदिर के अधिकारियों पर लगाये गये हैं गंभीर आरोप

आरोप है कि दक्षिणेश्वर मंदिर के अधिकारियों के पास पिछले कुछ वर्षों में बंगाल सरकार से प्राप्त 130 करोड़ रुपए और केंद्र सरकार से विभिन्न मदों में मिले 20 करोड़ रुपए का उचित लेखा-जोखा नहीं है. मंदिर के ट्रस्ट के अधिकारियों ने मंदिर परिसर के भीतर दुकान मालिकों को स्थान आवंटित करने के साथ-साथ ट्रस्टी बोर्ड के पदाधिकारियों का चुनाव किया, जो अदालत के निर्देश के 20 साल बाद हुआ. इस चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं. याचिकाकर्ताओं ने ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसी या किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली न्यायिक समिति से मामले की स्वतंत्र जांच की अपील की है.

1848 में रानी रासमणि ने शुरू करवाया था मंदिर का निर्माण

प्रसिद्ध समाजसेवी रानी रासमणि ने वर्ष 1848 में मंदिर का निर्माण शुरू करवाया था. मंदिर का निर्माण वर्ष 1856 में पूरा हुआ. गदाधर चट्टोपाध्याय, जो बाद में रामकृष्ण परमहंस के रूप में विख्यात हुए, को पुजारी के रूप में नियुक्त किया गया. शुरू में रामकृष्ण अपने बड़े भाई रामकुमार चट्टोपाध्याय की सहायता करते थे, जो उस समय मंदिर के मुख्य पुजारी थे. बाद में बड़े भाई की मृत्यु के बाद रामकृष्ण ने मुख्य पुजारी के रूप में पदभार संभाला. कहा जाता है कि रानी रासमणि ने सपने में देवी काली के दिव्य दर्शन के बाद मंदिर का निर्माण शुरू करवाया था.

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Mithilesh Jha

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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