सीनेट की गैर मौजूदगी के कारण नहीं होगा सीयू का दीक्षांत समारोह

Updated at : 29 Sep 2024 1:05 AM (IST)
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सीनेट की गैर मौजूदगी के कारण नहीं होगा सीयू का दीक्षांत समारोह

यूनिवर्सिटी आमतौर पर वार्षिक दीक्षांत समारोह में पीएचडी सर्टिफिकेट प्रदान करती है.

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कोलकाता. इस साल भी कलकत्ता यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं किया जायेगा. चार साल के अंतराल के बाद पीएचडी डिग्री प्रदान करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा, क्योंकि वर्तमान में सीनेट मौजूद नहीं है. यूनिवर्सिटी आमतौर पर वार्षिक दीक्षांत समारोह में पीएचडी सर्टिफिकेट प्रदान करती है. दीक्षांत समारोह की कार्यवाही को ‘सीनेट’ (सर्वोच्य निर्णायक बॉडी) ही मंजूरी देती है लेकिन वर्तमान में सीनेट मौजूद नहीं है. शनिवार को विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि पिछली सीनेट का कार्यकाल 2022 में समाप्त हो गया था और निकाय का गठन नहीं किया जा सका, क्योंकि उच्च शिक्षा विभाग ने अभी तक अपना नामांकन नहीं भेजा है.

विभाग ने हालिया परामर्श में राज्य सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों से भी दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं करने को कहा है, क्योंकि परिसरों का संचालन कार्यवाहक कुलपतियों द्वारा किया जा रहा है, जिन्हें कथित तौर पर सरकार से परामर्श किये बिना राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया गया है. यूनिवर्सिटी की अंतरिम वीसी शांता दत्त ने कहा कि पीएचडी डिग्री अवॉर्ड नहीं दिये जाने से विद्यार्थियों को उच्च अध्ययन करने के रास्ते में रुकावट आ रही है. उनकी स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय ने पीएचडी डिग्री पुरस्कार समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है. मेडल उसी दिन दिये जायेंगे. राज्य सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों के पदेन चांसलर व राज्यपाल सीवी आनंद बोस को विश्वविद्यालय द्वारा डिग्री प्रदान करने के लिए आमंत्रित किया गया है.

आखिरी बार 2000 में आयोजित हुआ था दीक्षांत समारोह

ध्यान रहे कि सीयू ने आखिरी बार अपना दीक्षांत समारोह कोरोना महामारी की शुरुआत से कुछ महीने पहले 27 जनवरी, 2000 को नजरुल मंच पर आयोजित किया था, जबकि महामारी के कारण वर्ष 2021 और 2022 में दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं किया जा सका. पिछले साल सीनेट के अस्तित्व में नहीं होने के कारण समारोह आयोजित नहीं किया जा सका था. वीसी ने कहा कि अभी दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं किया जा सकता, क्योंकि सीनेट का पुनर्गठन नहीं हुआ है. रजिस्ट्रार देबाशीष दास ने कहा कि सीनेट का पुनर्गठन नहीं किया जा सका, क्योंकि विश्वविद्यालय को अभी तक राज्य सरकार के नॉमिनी और निर्वाचित शिक्षकों के निकाय के नाम नहीं मिले हैं. एक अधिकारी ने कहा कि वीसी और विभाग के बीच मतभेद को देखते हुए यह संभावना नहीं है कि विभाग सीनेट में अपना नामांकन भेजेगा. शिक्षा विभाग ने रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर यह भी कहा था कि चूंकि विश्वविद्यालय के पास नियमित वीसी नहीं है, इसलिए सिंडिकेट की बैठक आयोजित करना 2019 में निर्धारित नियमों का उल्लंघन होगा. शिक्षा विभाग ने राज्य सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों से कहा था कि वे ”राज्य की मंजूरी के बिना” अपने निर्णय लेने वाले निकायों की बैठकें नहीं बुला सकते और न ही दीक्षांत समारोह आयोजित कर सकते हैं.

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