राज्य सरकार नहीं, खुद सीइएससी बढ़ा रही बिजली की कीमत : ममता बनर्जी

Updated at : 13 Feb 2025 1:50 AM (IST)
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राज्य सरकार नहीं, खुद सीइएससी बढ़ा रही बिजली की कीमत : ममता बनर्जी

गर्मी के बढ़ते ही लोग पंखा और एसी चालू कर देते हैं. ऐसे में बिजली की खपत बढ़ते ही कीमतें भी बढ़ जाती हैं.

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बिजली होगी सस्ती, सीएम ने देवचा पचामी को लेकर किया बड़ा एलान

संवाददाता, कोलकाता

गर्मी के बढ़ते ही लोग पंखा और एसी चालू कर देते हैं. ऐसे में बिजली की खपत बढ़ते ही कीमतें भी बढ़ जाती हैं. विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां सीइएससी बिजली की आपूर्ति करती है. बुधवार को राज्य बजट पेश होने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार सीइएससी क्षेत्र में कभी बिजली की कीमत नहीं बढ़ाती है. मुख्यमंत्री ने कहा : राज्य सरकार बिजली की कीमतें नहीं बढ़ाती है, लेकिन सीइएससी बढ़ाती है. इस कारण लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. यह हमारे हाथ में नहीं है. वे स्वायत्त संस्थान है. उन्होंने कहा कि वाममोर्चा सरकार द्वारा सीइएससी का निजीकरण कर दिया गया था. ऐसे में बुधवार को बजट पेश होने के बाद ममता बनर्जी ने देवचा पचामी को लेकर बड़ी घोषणा की. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देवचा पचामी से कोयला खनन शुरू होने पर बिजली की कीमत काफी कम हो जायेगी. इस परियोजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वालीं पीढ़ियों को अगले 100 वर्षों तक लोडशेडिंग की समस्या से जूझना न पड़े और बिजली की कीमतें न बढ़ें. कम से कम एक लाख युवाओं को नौकरी मिलेगी. सीएम ने कहा कि अगर कोयला उत्पादन होगा, तो बिजली की कीमत भी कम हो जायेगी. उन्होंने कहा : वहां से हमें जो कोयला मिलेगा, उससे सौ साल तक बिजली पैदा होगी. हम यह परियोजना इसलिए बना रहे हैं, ताकि हमें कम कीमत पर बिजली मिल सके.

गौरतलब है कि बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि बुनियादी ढांचा तैयार है और अगर चाहें, तो बीरभूम में देवचा पचामी कोयला खदानों में 24 घंटे के भीतर काम शुरू हो सकता है. सीएम के अनुसार, छह फरवरी को एशिया की दूसरी सबसे बड़ी कोयला खदान में काम शुरू हो चुका है. हालांकि, देवचा-पचामी में इस तरह का काम शुरू करना बिल्कुल भी आसान काम नहीं था. भू मालिकों के पुनर्वास, नौकरी और वित्तीय सहायता के प्रशासनिक आश्वासन के बावजूद, कोयला खदान क्षेत्र के कई निवासियों ने आपत्ति जतायी. उनका दावा था कि कोयला खनन से क्षेत्र का पर्यावरण नष्ट हो जायेगा. जंगल काट दिये जायेंगे. हालांकि, प्रशासन के सतत अभियान से उन समस्याओं का समाधान हो चुका है.

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