पॉक्सो केस में कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 7 गवाहों से फिर होगी पूछताछ

कलकत्ता हाईकोर्ट.
Calcutta High Court News: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में बड़ा फैसला देते हुए सात गवाहों से दोबारा जिरह की अनुमति दी है. कोर्ट ने कहा कि हर केस का फैसला उसके हालात के आधार पर होना चाहिए. इससे पहले निचली अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देकर आरोपी की अर्जी खारिज कर दी थी.
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Calcutta High Court News: कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पॉक्सो केस में बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने गवाहों से दोबारा जिरह की इजाजत दी है. कहा है कि पॉक्सो मामलों में हर केस को उसके अपने हालात के हिसाब से देखा जाना चाहिए. आमतौर पर ऐसे मामलों में पीड़ित या गवाहों को बार-बार कोर्ट में नहीं बुलाया जाता. कोर्ट ने इस नियम में अपवाद यानी खास स्थिति में छूट दी है.
7 गवाहों से दोबारा जिरह की मंजूरी
जस्टिस अपूर्बा सिन्हा राय ने लोअर कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 7 गवाहों से दोबारा जिरह की मांग ठुकरा दी गयी थी. हालांकि, उन्होंने माना कि पॉक्सो मामलों में गवाहों को मामूली वजह से बार-बार नहीं बुलाया जाना चाहिए.
निचली अदालत ने क्यों ठुकराई थी मांग?
उत्तर और मध्य अंडमान की निचली अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के मुताबिक, पॉक्सो मामलों में पीड़ित या गवाहों को दोबारा बुलाने से बचना चाहिए, जब तक कि बहुत जरूरी न हो. इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गयी थी.
विशेष पॉक्सो अदालत के जज की टिप्पणी बिल्कुल सही थी और इस मामले में कोई दो राय नहीं हो सकती, लेकिन प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उसके गुण-दोष के आधार पर किया जाना चाहिए.
जस्टिस अपूर्बा सिन्हा राय, कलकत्ता हाईकोर्ट
Calcutta High Court का साफ संदेश
पोर्ट ब्लेयर सर्किट पीठ के 5 फरवरी के फैसले में जस्टिस राय ने कहा कि निचली अदालत की बात सही थी, लेकिन हर मामले को उसके गुण-दोष यानी पूरे हालात देखकर तय किया जाना चाहिए.
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पहले दोषी करार, फिर सजा रद्द
इस मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने वर्ष 2022 में एक व्यक्ति को एक लड़की से बलात्कार का दोषी ठहराया था. वर्ष 2024 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आरोपी को दोषी करार दिये जाने के फैसले के साथ-साथ उसकी 10 साल की कठोर कैद की सजा को रद्द कर दिया. इस केस में दोबारा बहस का आदेश दिया.
केस से जुड़ी खास बातें
- बलात्कार के मामले में निचली अदालत ने आरोपी की अपील को ठुकरा दिया.
- हाईकोर्ट ने कहा – हर मामले का फैसला गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए.
- वर्ष 2022 में उत्तर और मध्य अंडमान की आरोपी को दोषी ठहराया गया था.
- वर्ष 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट की पीठ ने आरोपी की 10 साल की सजा रद्द कर दी.
- हाईकोर्ट ने फिर रद्द किया लोअर कोर्ट का आदेश, गवाहों से फिर से पूछताछ की अनुमति दी.
विवादों से भरा है केस का इतिहास
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि इस मामले का पूरा इतिहास विवादों से भरा है. 31 अगस्त 2022 को निचली अदालत ने उसे दोषी ठहराया था. फिर 9 अप्रैल 2024 को हाईकोर्ट ने फैसला रद्द कर दया. हाईकोर्ट ने निचली अदालत से कहा कि वह आरोपी से दोबारा पूछताछ करे और नया फैसला लिखे.
आरोपी ने की गवाहों से दोबारा बहस की नयी अपील
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद निचली अदालत ने आरोपी से पूछताछ पूरी की. इसके बाद आरोपी ने कई गवाहों से दोबारा पूछताछ की मांग की, लेकिन निचली अदालत ने इस आवेदन को खारिज कर दिया. अब हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को भी रद्द कर दिया है.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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