बंगाल में वाममोर्चा में पड़ी दरार, मध्यमग्राम सीट पर फॉरवर्ड ब्लॉक उतारेगा उम्मीदवार

Updated at : 25 Mar 2026 12:52 PM (IST)
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बंगाल में वाममोर्चा में पड़ी दरार, मध्यमग्राम सीट पर फॉरवर्ड ब्लॉक उतारेगा उम्मीदवार

फॉरवर्ड ब्लॉक

Bengal Election: 2011 के बाद से वाममार्चा लगातार चुनावी हार का सामना कर रहा है और शून्य पर पहुंच चुका है. इस बार जनाधार बढ़ने की उम्मीद लगाये बैठे नेताओं को इन विवादों से निराशा हो सकती है.

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Bengal Election: कोलकाता. विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही सीट बंटवारे को लेकर वाममोर्चा में मतभेद उभरने लगे हैं. खासकर माकपा और फॉरवर्ड ब्लॉक के बीच मध्यमग्राम सीट को लेकर टकराव बढ़ता दिख रहा है. ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के जनरल सेक्रेटरी नरेन चटर्जी ने मध्यमग्राम सीट इंडियन सेकुलर फ्रंट (आइएसएफ) के लिए छोड़े जाने पर नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम को स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी को आवंटित सीटों में किसी तरह की कटौती या बदलाव स्वीकार नहीं किया जायेगा.

अब तक 240 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा

बताया जा रहा है कि फॉरवर्ड ब्लॉक अब वामे-आइएसएफ गठबंधन से अलग रुख अपनाते हुए मध्यमग्राम सीट पर अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहा है. वाममोर्चा ने 294 विधानसभा सीटों में से तीन चरणों में कुल 240 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. इनमें सहयोगी दल फॉरवर्ड ब्लॉक को 24 सीटें दी गयी हैं. इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नजर आ रहा है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि आइएसएफ के साथ गठबंधन को लेकर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मध्यमग्राम और देगंगा सीटों पर फॉरवर्ड ब्लॉक अपने उम्मीदवार उतारना चाहता था. हालांकि, आइएसएफ के संस्थापक नौशाद सिद्दिकी द्वारा जारी सूची में इन दोनों सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिये गये, जिससे विवाद और गहरा गया.

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वाममोर्चा की स्थिति कमजोर

इन सीटों को फॉरवर्ड ब्लॉक की मांगों की अनदेखी करते हुए आइएसएफ के लिए छोड़ दिया गया. मध्यमग्राम सीट से आइएसएफ की उम्मीदवार प्रियंका बर्मन हैं, जिसे फॉरवर्ड ब्लॉक स्वीकार करने को तैयार नहीं है. इसी कारण पार्टी ने यहां से अलग उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है. गौरतलब है कि 2011 के बाद से वाममार्चा लगातार चुनावी हार का सामना कर रहा है और शून्य पर पहुंच चुका है. इस स्थिति से उबरने के लिए गठबंधन और नये चेहरों को आगे लाने की रणनीति अपनायी जा रही है. हालांकि, सहयोगी दलों के बीच बढ़ती दरारें चुनावी मैदान में वाममोर्चा की स्थिति को और कमजोर कर सकती हैं.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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