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आइआइटी खड़गपुर में नये अनुसंधान की घोषणा

Updated at : 20 Dec 2025 1:36 AM (IST)
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आइआइटी खड़गपुर में नये अनुसंधान की घोषणा

दा विंची रिसर्च किट डिजिटल मॉडलों को भौतिक रोबोटिक गतियों से जोड़ता है

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कोलकाता. आइआइटी खड़गपुर ने इंट्यूटिव फाउंडेशन के साथ साझेदारी में एक नवीन अनुसंधान कार्यक्रम की घोषणा की है. इंट्यूटिव फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसे इंट्यूटिव सर्जिकल द्वारा वित्तपोषित किया जाता है. जो न्यूनतम इनवेसिव चिकित्सा में वैश्विक प्रौद्योगिकी अग्रणी और रोबोटिक-सहायित सर्जरी का अग्रदूत है. इस पहल का उद्देश्य सर्जिकल देखभाल के व्यापक डिजिटल मॉडल विकसित करना है, जो भविष्य में रोबोटिक-सहायित प्रक्रियाओं के लिए अधिक विश्वसनीय सुरक्षा मार्गदर्शन, एआई-सक्षम निर्णय सहायता और जिम्मेदार प्रारंभिक स्वचालन की आधारशिला रख सकें.

इन मॉडलों के परीक्षण हेतु आइआइटी खड़गपुर दा विंची रिसर्च किट का उपयोग करेगा, जो सेवानिवृत्त दा विंची प्रणालियों से निर्मित एक गैर-नैदानिक शोध मंच है. दा विंची रिसर्च किट डिजिटल मॉडलों को भौतिक रोबोटिक गतियों से जोड़ता है, जिससे फैंटम्स, कृत्रिम ऊतकों और शारीरिक मॉडलों का उपयोग कर प्रारंभिक स्वचालन मॉड्यूल का विकास एवं परीक्षण संभव हो पाता है. सभी परीक्षण नियंत्रित प्रयोगशाला वातावरण में किये जायेंगे और इनमें मानव सर्जरी शामिल नहीं होगी. यह कार्य एक बहु-विषयक शोध दल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है तथा कोलकाता स्थित नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के साथ आइआइटी खड़गपुर के दीर्घकालिक सहयोग द्वारा समर्थित है. वास्तविक नैदानिक परिस्थितियों में कोलेसिस्टेक्टॉमी (पित्ताशय को शल्य चिकित्सा द्वारा हटाने की प्रक्रिया) का विस्तृत प्रलेखन करते हुए, शोधकर्ता यह समझ विकसित करेंगे कि सर्जरी किस प्रकार संपन्न होती है, जिससे डिजिटल मॉडलों को परिष्कृत करने और उन क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिलेगी, जहां सहायक उपकरणों का सर्वाधिक प्रभाव हो सकता है.

आइआइटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा, यह कार्यक्रम शल्य चिकित्सा देखभाल से जुड़ी जटिल चुनौतियों के समाधान हेतु अकादमिक जगत, चिकित्सकों और वैश्विक प्रौद्योगिकी साझेदारों के बीच सहयोग की शक्ति को दर्शाता है.

इंट्यूटिव फाउंडेशन और हमारे नैदानिक सहयोगियों के साथ निकटता से कार्य करते हुए, हम अभियांत्रिकी विज्ञान को वास्तविक सर्जिकल विशेषज्ञता के साथ जोड़ रहे हैं, ताकि ऐसा ज्ञान विकसित किया जा सके जिसे साझा किया जा सके, सत्यापित किया जा सके और सामूहिक रूप से आगे बढ़ाया जा सके. इस प्रकार की साझेदारियां सर्जिकल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और विश्वभर में रोगियों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने हेतु मजबूत और जिम्मेदार ढाँचों के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं.

आइआइटी खड़गपुर के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. देबदूत शीट ने कहा, हमारा मुख्य उद्देश्य सर्जरी का ऐसा प्रलेखन करना है, जिसे संगणकीय प्रणालियां समझ सकें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

लेखक के बारे में

By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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