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राज्य के सिंचाई व जलमार्ग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने डीवीआरआरसी को लिखा पत्र

Updated at : 24 Jun 2025 1:50 AM (IST)
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राज्य के सिंचाई व जलमार्ग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने डीवीआरआरसी को लिखा पत्र

पत्र में मैथन और पंचेत बांधों से छोड़े गये पानी की मात्रा और दुर्गापुर बैराज में प्रवाहित जल स्तर पर स्पष्टीकरण मांगा गया है.

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मैथन और पंचेत बांधों से संयुक्त रूप से पानी छोड़े जाने पर मांगा स्पष्टीकरण

मानस भुईंया बोले: बिना पूर्व सहमति डिस्चार्ज बढ़ाया गया, दो लाख लोग हुए प्रभावित, 188 गांव जलमग्नकोलकाता. राज्य के सिंचाई एवं जलमार्ग विभाग ने दामोदर घाटी जलाशय विनियमन समिति (डीवीआरआरसी) के सदस्य सचिव को एक कड़ा पत्र भेजा है. पत्र में मैथन और पंचेत बांधों से छोड़े गये पानी की मात्रा और दुर्गापुर बैराज में प्रवाहित जल स्तर पर स्पष्टीकरण मांगा गया है. यह जानकारी सोमवार को राज्य विधानसभा में विभागीय मंत्री डॉ मानस भुइयां ने एक बयान में दी. उन्होंने बताया कि 21 जून को दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (डीवीसी) से संयुक्त रूप से 60,500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की योजना थी, लेकिन वास्तविक रिकॉर्ड के अनुसार डीवीसी ने डीवीआरआरसी की सलाह पर यह मात्रा 70,000 क्यूसेक तक बढ़ा दी. इस अतिरिक्त डिस्चार्ज से हावड़ा, हुगली और पश्चिम बर्दवान के कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी.

प्रशासन ने मांगा स्पष्टीकरण

डॉ. भुइयां ने कहा कि विभाग ने डीवीआरआरसी को लिखे पत्र में यह जानना चाहा है कि क्या डिस्चार्ज में वृद्धि अनियंत्रित जलग्रहण क्षेत्र से अत्यधिक जलप्रवाह के कारण हुई, और यदि हां, तो इसका पूर्व आकलन क्यों नहीं किया गया. साथ ही पूछा गया है कि जब 60,000 क्यूसेक से अधिक नहीं छोड़ने की प्रतिबद्धता थी, तो इस प्रकार के प्रवाह को पहले से ध्यान में क्यों नहीं रखा गया? मंत्री ने बताया कि स्थिति बिगड़ने के बाद धीरे-धीरे डिस्चार्ज को घटाया गया, जो 21 जून की शाम: 62,000 क्यूसेक तक और फिर घटाकर: 49,000 क्यूसेक किया गया और फिर 23 जून रविवार सुबह 9.45 बजे से: 42,500 क्यूसेक किया गया.

1978 के बाद सबसे ज्यादा जून में बारिश

डॉ भुइयां ने बताया कि बंगाल के दक्षिणी जिलों में 17 से 20 जून के बीच 247 से 329 मिमी तक भारी बारिश दर्ज की गयी, जो संभवतः 1978 के बाद जून महीने में सबसे ज्यादा वर्षा रही है. उन्होंने कहा कि मुकुटमणिपुर बांध ने प्रभावी जलाशय नियंत्रण के जरिये स्थिति को संभाल लिया और वहां से पानी नहीं छोड़ा गया. परंतु द्वारकेश्वर, गंधेश्वरी और सिलावती नदियों के अनियंत्रित जलग्रहण क्षेत्रों से बाढ़ का पानी आया, जिससे चंद्रकोना (1), चंद्रकोना (2), दासपुर (1) (पश्चिम मिदनापुर) और आरामबाग, खानकुल (1 व 2) (हुगली) में पानी भर गया. बाढ़ से करीब 2 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और 188 गांव जलमग्न हो गये हैं. राज्य सरकार द्वारा राहत और पुनर्वास कार्य युद्ध स्तर पर जारी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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