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73 शिक्षकों को मिला शिक्षा रत्न बंगाल ने देश को दिखायी राह : ममता

Updated at : 05 Sep 2025 2:36 AM (IST)
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73 शिक्षकों को मिला शिक्षा रत्न बंगाल ने देश को दिखायी राह : ममता

शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार सुबह कोलकाता के धनधान्य सभागार में शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया.

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जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आयी तो पश्चिम बंगाल में विश्वविद्यालयों की संख्या थी 12, अब 47

-पांच और प्रस्ताव राज्यपाल की मंजूरी के इंतजार में

संवाददाता, कोलकाता

शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार सुबह कोलकाता के धनधान्य सभागार में शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर कुल 73 शिक्षकों को शिक्षा रत्न सम्मान प्रदान किया गया. साथ ही 2025 के मेधावी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि तृणमूल सरकार के कार्यकाल में बड़ी संख्या में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति हुई है. अब तक 10 हजार प्रोफेसरों और प्राचार्यों की नियुक्ति की जा चुकी है. उन्होंने कहा, “जब तृणमूल सरकार सत्ता में आयी थी, तब राज्य में विश्वविद्यालयों की संख्या केवल 12 थी, जो अब बढ़कर 47 हो गयी है. पांच और विश्वविद्यालयों के प्रस्ताव राज्यपाल की मंजूरी के इंतजार में हैं. इसके अलावा 14 नये मेडिकल कॉलेज बनाये गये हैं.” मुख्यमंत्री ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 36 लाख 55 हजार विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए स्वामी विवेकानंद छात्रवृत्ति मिली है. 44 लाख लोगों ने तकनीकी शिक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जो भारत में सबसे ज्यादा है. अल्पसंख्यकों के लिए भी छात्रवृत्ति की व्यवस्था है, जिस पर 9747 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं. 40 हजार बच्चों को अब तक 316 करोड़ रुपये का शिक्षा ऋण दिया गया है.

मुख्यमंत्री ने बताया, “ वर्तमान में शिक्षकों के 56 हजार पद रिक्त हैं, जिनमें से 35,726 पदों के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया है. हम भर्ती करना चाहते हैं, लेकिन कानूनी पेचीदगियों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है. यह उन लोगों के कारण हो रहा है जिन्होंने कानून को ताक पर रख दिया है. मैं अदालत को दोष नहीं दूंगी. हमारे हाथ-पैर बंधे हुए हैं. लेकिन हम उन्हें एक मौका दे रहे हैं, ताकि वे परीक्षा पास कर अपनी नौकरी पर वापस आ सकें.”

मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल ने हमेशा देश को राह दिखायी है. एक समय छोटी बच्चियों की शादी बहुत कम उम्र में कर दी जाती थी. विद्यासागर ने बाल विवाह समाप्त किया. एक दिन सती प्रथा के उन्मूलन का विधेयक भी बंगाल विधानसभा से पारित हुआ और बाद में पूरे भारत ने इसे अपनाया. पहले स्कूल छोड़ने वालों की दर बहुत अधिक थी. लेकिन कन्याश्री, ऐक्यश्री, मेधाश्री जैसी विभिन्न परियोजनाओं के बाद यह संख्या शून्य पर पहुंच गयी है.

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शिक्षा और खेल में उत्कृष्टता के लिए 12 सर्वश्रेष्ठ स्कूलों को पुरस्कार प्रदान किया. कुल 73 शिक्षकों को शिक्षा रत्न सम्मान मिला, जिनमें 39 स्कूल शिक्षक, 21 कॉलेज और विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तथा 13 व्यावसायिक और अन्य आइआइटी शिक्षक शामिल हैं. प्रत्येक शिक्षक को प्रमाण पत्र, शॉल, घड़ी, स्मारिका, पुस्तक और 25 हजार रुपये प्रदान किये गये. सभी बोर्डों के 387 मेधावी छात्रों को भी सम्मानित किया गया. उन्हें प्रमाण पत्र, टैब, लैपटॉप, ‘जेम्स ऑफ बंगाल’ नामक पुस्तक और मुख्यमंत्री द्वारा हस्ताक्षरित डायरी दी गयी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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