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एक बूथ, दस यूथ का फार्मूला पश्चिम बंगाल में करेंगे लागू : दिलीप घोष

Updated at : 15 Dec 2015 3:04 PM (IST)
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एक बूथ, दस यूथ का फार्मूला पश्चिम बंगाल में करेंगे लागू : दिलीप घोष

पांच बड़ी बातेंजोपश्चिम बंगाल भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष ने प्रभात खबर डॉट काॅम से कही : हर विधानसभा क्षेत्र का पूर्णकालिक प्रभारी नियुक्त 100 बूथ पर कार्यकर्ता तैयार करने का प्रयास 15 से 20 प्रतिशत फ्लोटिंग वोटों पर हमारी नजर बिहार चुनाव का बंगाल पर असर नहीं मोदी सरकार का काम दीर्घकालिक, दिखेंगे नतीजे भाजपा […]

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पांच बड़ी बातेंजोपश्चिम बंगाल भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष ने प्रभात खबर डॉट काॅम से कही :

हर विधानसभा क्षेत्र का पूर्णकालिक प्रभारी नियुक्त

100 बूथ पर कार्यकर्ता तैयार करने का प्रयास

15 से 20 प्रतिशत फ्लोटिंग वोटों पर हमारी नजर

बिहार चुनाव का बंगाल पर असर नहीं

मोदी सरकार का काम दीर्घकालिक, दिखेंगे नतीजे

भाजपा हाइकमान की नजर आने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों पर है. पार्टी के लिए असम, उत्तरप्रदेश के साथ ही पश्चिम बंगाल अहम चुनावी राज्य हैं. चुनावी तैयारी के मद्देनजर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पूर्णत: संगठन का आदमी माने जाने वाले दिलीप घोष को पश्चिम बंगाल भाजपा का अध्यक्षनियुक्त किया है. घोषकी नियुक्ति इस मायने में अहम है कि अब 2016 में होने वाला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में पार्टी लड़ेगी. दिलीप घोष को इन जिम्मेवारियों का अहसास है, इसलिए पद संभालने के साथ ही वे फॉर्म में आ गये हैं और पार्टी के लिए कई स्तर पर कार्ययोजनाएं तयकररहे हैं. उनसे प्रभात खबर डॉट कॉम के लिए राहुल सिंह ने बात की. प्रस्तुत है प्रमुख अंश :

प्रश्न :2016में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए आपकी क्या रणनीति व तैयारियां हैं?

उत्तर : पिछले लोकसभा चुनाव में हमें 17 प्रतिशत वोट मिले थे. हालांकि उसके बाद पालिका चुनावों में हमारे वोट प्रतिशत थोड़े गिरे, लेकिन हमनेबड़ी तैयारियां की हैं. हम पिछले छह महीने से आंदोलन कर रहे हैं. हम सभी 33 जिलों में जेल भरो, कानून तोड़ो अभियान चला रहे हैं.

इसके अलावा हमारी पार्टी ने हर एक विधानसभा क्षेत्र में एक पूर्णकालिक कार्यकर्ता को प्रभारी नियुक्त किया है. चार अखिल भारतीय अधिकारी और हमारे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा सीधे पार्टी का काम देख रहे हैं. हमारे संगठन में 108 लोग हैं, जो पार्टी की जिम्मेवारियां संभाल रहे हैं.

हम बूथ मैनेजमेंट पर बहुत ध्यान दे रहे हैं. पहले 30 से 40 प्रतिशत बूथों पर हमारे कार्यकर्ता थे, अब हमारे कार्यकर्ता 70 प्रतिशत बूथों पर हैं. बूथों पर कार्यकर्ता तैयार करने के लिए हम 15 से 25 जनवरी तक अभियान चलायेंगे. उसके बाद 26 जनवरी को हम बूथ सम्मेलन करेंगे. हमारा लक्ष्य है कि हर बूथ पर हमारे कम से कम 10 कार्यकर्ता हों. इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कार्यक्रम की रूपरेखा भी बन रही है. हालांकिअभी इसकी तारीख तय नहीं हुई है.

प्रश्न : पर, आपको नहीं लगता कि आपके विरोधी दल एकजुट हो रहे हैं, जो आपके लिए चिंता की बात होनी चाहिए. ममता बनर्जी कांग्रेस अध्यक्ष से मिलती है, उधर कांग्रेस व वाम के रिश्ते अच्छे होते दिखते हैं.

उत्तर : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम कभी एक नहीं हो सकते हैं. बहुत अधिक तो कांग्रेस व सीपीएम में गंठबंधन होगा. यहां तीन खेमों में ही लड़ाई लड़ी जायेगी. 15 से 20 प्रतिशत फ्लोटिंग वोट जो पिछली बार तृणमूल कांग्रेस को मिले थे वे इस बार हमारे पास आयेंगे. तृणमूल ने पिछले बार परिवर्तन लाने का नारा दिया था, लेकिन वह परिवर्तन नहीं ला पायी. शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा की स्थिति यहां बहुत खराब है. इसलिए हमने इस बार नारा दिया है परिवर्तन से परित्राण.

प्रश्न : बांग्लादेशी घुसपैठ कितना बड़ा मुद्दा होगा. आप इस विषय पर जोर देते रहे हैं.


उत्तर :
घुसपैठ का मुद्दा बंगाल की अखंडता से जुड़ा हुआ है.आपको मालूम होगा कि बंगाल का विभाजन हिंदू मुसलिम जनसंख्या के आधार पर हुआ था. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का मानना था कि पाकिस्तान की मांग करने वालों ने हिंदुस्तान तोड़ा है, तो हम पाकिस्तान तोड़ेंगे. इस राज्य में जनसंख्या का अनुपात तेजी से बदल रहा है. यह घुसपैठ का नतीजा है.

यहां विस्फोटक स्थिति है. अलकायदा व सिमी का यहां अड्डा बन रहा है. वर्द्धमान में बम विस्फोट हुआ, खून बहा, तो कहा सिलिंडर विस्फोटा हुआ है और मुर्गे का खून है. वास्तव में हमारी आंतरिक सुरक्षा खतरे में है. आज महिलाएं व बच्चियां घर से सुरक्षित बाहर नहीं जा सकती हैं.

प्रश्न : बंगाल आजादीके पहले औद्योगिकीकरण में अग्रणी था, यहां कई उद्योग थे पर आज देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में इसकी कोई गणना नहीं है. यह कितना बड़ा मुद्दा है?

उत्तर : यह अहम मुद्दा है. यह राज्य व कोलकाता उद्योग का केंद्र होता था, आज कोलकाता की आबादी कम हो रही है. यहां के उद्योग धंधे बंद हो रहे हैं. पत्थर तोड़ने यहां के युवा तमिलनाडु व राजस्थान जा रहे हैं. यहां के बच्चे नौकरी के लिए गुजरात, मध्यप्रदेश व दक्षिणी राज्यों में जा रहे हैं. राज्य के मानव संसाधन का यहां उपयोग नहीं हो रहा है और वह कम होता जा रहा है.

प्रश्न : नरेंद्र मोदी के डेढ़ साल का कामकाज को आप भी और विपक्ष भी मुद्दा बना रहा है. जीएसटी जैसे अहम विधेयक का क्या हश्र हो रहा है?

उत्तर : केंद्र की हमारी सरकार को राज्यसभा में बहुमत हासिल नहीं है. कांग्रेस कार्यवाही रोक रही है. मोदी जी कहते हैं कि न खाएंगे और न खाने देंगे, लेकिन कांग्रेस का सिद्धांत है कि न काम करेंगे और न काम करने देंगे.

हमारी सरकार के काम दूरगामी रणनीति के तहत हो रहे हैं. जिनको जमीन पर फलीभूत होने में समय लगता है. लंबे समय में लोगों को उनका लाभ होगा. पर, लोगों का हाथ व उम्मीदें नरेंद्र मोदी जी और भाजपा के साथ है. आप देखिए, दाल की कीमतें बढ़ने की बात लोग करते हैं, लेकिन कई चीजों की दामें कितनी कम हुई हैं.

प्रश्न : अंतिम सवाल, बिहारविधानसभा चुनाव का कितना असर पश्चिम बंगाल के चुनाव पर होगा? क्या बिहार चुनाव में करारी शिकस्त से कार्यकर्ताओं का मनोबल नहीं टूट गया है?

उत्तर : बिहार चुनाव बंगाल के लिए मुद्दा नहीं है. क्या झारखंड और हरियाणा के चुनाव परिणाम का असर बिहार पर पड़ा? नहीं न. तो फिर बिहार चुनाव परिणाम का असर बंगाल पर कैसे पड़ेगा? दोनों की परिस्थितियां और माहाैल अलग हैं. यहां की जनता बहुत समझदार है. 34 साल से जड़ें जमायी सीपीएम को यहां की जनता ने उखाड़ फेंका. कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ रहा है.

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