बंगाल ग्लोबल बिजनेस सम्मिट में कौन-कौन से देश से लोग आ आ रहे हैं, इस बाबत कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है. पश्चिम बंगाल एक गरीब राज्य है. ऋण से जजर्र इस राज्य के लिए ऐसे आयोजन हमेशा ही पैसों की बरबादी ही साबित हुए हैं. इससे पहले भी राज्य सरकार अपनी टीम के साथ सिंगापुर की यात्र पर गयी थी, लेकिन उस यात्र का मकसद निवेश आमंत्रण नहीं, सिर्फ मनोरंजन था. यह सम्मेलन भी पैसों की बरबादी ही साबित होगा. राहुल सिन्हा ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री व सूचना मंत्री इसमें इसलिए शामिल हो रहे हैं, क्योंकि राज्य की उन्नति के लिए उनपर असहयोग का आरोप न लगे.
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बंगाल में निवेश नहीं आने पर तृणमूल सरकार पर बरसी भाजपा, कहा सरकार की नीति उद्योग के हित में नहीं
कोलकाता: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की ओर से भले ही बंगाल ग्लोबल बिजनेस सम्मित किया जा रहा हो, लेकिन राज्य की स्थिति नहीं सुधरनेवाली. राज्य सरकार केवल अंधानुकरण कर सकती है, लेकिन राज्य के लोगों का भला करने की कोई योजना उसके पास नहीं है. बंगाल ग्लोबल […]
कोलकाता: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की ओर से भले ही बंगाल ग्लोबल बिजनेस सम्मित किया जा रहा हो, लेकिन राज्य की स्थिति नहीं सुधरनेवाली. राज्य सरकार केवल अंधानुकरण कर सकती है, लेकिन राज्य के लोगों का भला करने की कोई योजना उसके पास नहीं है.
सरकार के दावों पर सवाल
राहुल सिन्हा ने कहा कि बंगाल में निवेश के संबंध में राज्य सरकार ने हमेशा ही खोखले दावे किये हैं. वर्ष 2011 के 23 दिसंबर को तत्कालीन उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा था कि राज्य में 65 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है. इसके बाद 2013 के 27 दिसंबर को वित्त मंत्री अमित मित्र ने दावा किया कि राज्य में एक लाख 12 हजार 769 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है. लेकिन फिर 2015 के दो जनवरी को उन्होंने दावा किया कि 83 हजार 212 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है. इसमें 10 हजार करोड़ रुपये तो एनटीपीसी के ही हैं. यानी राज्य सरकार द्वारा जो भी आंकड़े दिये जा रहे हैं सभी कुछ मनघड़ंत है. सरकार की वेबसाइट में भी कोई जानकारी नहीं दी जाती. ऐसे में यहां कोई निवेश करने या उद्योग लगाने क्यों आयेगा. टाटा को लेकर सिंगूर में विवाद पैदा कर दिया गया. कहा गया कि जमीन लौटायी जायेगी. क्या हुआ उसका. शालबनी में जिंदल से जबरन जमीन ली गयी. उसे किसानो को लौटाने की कोशिश की गयी. लेकिन किसान जमीन नहीं चाह रहे थे. इससे राज्य के संबंध में गलत संदेश जाता है. जिस प्रकार माकपा ने उद्योग विरोधी नीति अपनायी उसी तरह तृणमूल भी कदम उठा रही है.
राज्य सरकार जबरन जमीन अधिग्रहण कानून का विरोध कर रही है, जबकि इस नये कानून में किसानों को बाजार दर से चार गुणा अधिक कीमत देने की बात कही गयी है. सिंगूर में 997 एकड़ जमीन को लेकर विवाद खड़ा किया गया, लेकिन उससे 20 फीट दूर ही वाजपेयी सरकार ने कहीं अधिक जमीन का अधिग्रहण एक्सप्रेस हाइवे के लिए किया था. तब सबकुछ आसानी से हो गया. किसानों में तो जमीन देने की प्रतियोगिता तब लग गयी थी. यदि तृणमूल सरकार को कृषकों के हितों की इतनी ही चिंता है, तो वह अंडाल के किसानों की समस्याओं का निपटारा क्यों नहीं करती.
राज्य में 50 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने कहा है कि राज्य में भाजपा सदस्यों की संख्या 10 लाख के पार हो गयी है. राज्य में भाजपा का लक्ष्य 50 लाख से अधिक सदस्य बनाना है. उन्होंने कहा कि 1.25 लाख सदस्यों को लेकर यह अभियान शुरू किया गया था. सदस्यता अभियान 31 मार्च तक चलेगा.15 व 27 जनवरी को भी राज्य भर के नेता बूथों पर जाकर नये सदस्य बनायेंगे. उनका सदस्यता अभियान पूरी तरह नि:शुल्क है. मंगलवार को श्री सिन्हा वार्ड 42 में पहुंचे और बड़ी तादाद में सदस्य बनायें. मौके पर जिलाध्यक्ष किशन झंवर, महामंत्री मानव शर्मा व दिनेश पांडे के अलावा पार्षद सुनीता झंवर, विजय ओझा, मीना देवी पुरोहित, सुनील हर्ष, गणोश ढंढानिया, राम प्रवेश सिंह, सुनील सक्सेना, गौरव खन्ना, भूपेंद्र साव, रजनी खेड़ा, संजीव पांडे, अमर यादव, गीता राय, चंद्रा खरवार व सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे.
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