सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, चिटफंड घोटाले की जांच में प्रगति नहीं
Updated at : 06 Nov 2014 9:13 AM (IST)
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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट को बुधवार को सूचित किया गया कि सीबीआइ में कार्मिकों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण चिटफंड घोटाले की जांच में कोई प्रगति नहीं हुई है. न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने सूचित किया कि करीब 44 कंपनियों और उनके […]
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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट को बुधवार को सूचित किया गया कि सीबीआइ में कार्मिकों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण चिटफंड घोटाले की जांच में कोई प्रगति नहीं हुई है. न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने सूचित किया कि करीब 44 कंपनियों और उनके अधिकारियों के खिलाफ सीबीआइ के सिर्फ चार-पांच अधिकारी ही जांच कर रहे हैं.
इस वजह से जांच किसी भी दिशा में नहीं बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि न्यायालय को हस्तक्षेप करके करोड़ों रुपये के घोटाले के इस मामले की जांच के लिये पर्याप्त संख्या में जांच अधिकारी उपलब्ध कराने चाहिए ताकि जांच निष्कर्ष तक पहुंच सके.
कोर्ट ने श्याम दीवान का पक्ष सुनने के बाद इस मामले में अगले सप्ताह सुनवाई करने का निश्चय किया. साथ ही यह भी सवाल किया कि सीबीआइ ने इस मसले को अभी तक उसके सामने क्यों नहीं रखा. शीर्ष अदालत ने नौ मई को पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और असम में सारधा सहित अनेक कपंनियों की कथित संलिप्तता वाले चिट फंड घोटालों की सीबीआइ जांच का आदेश दिया था. आरोप है कि इन घोटालों में निवेशकों का करीब दस हजार करोड़ रुपये डूब गया है. न्यायालय ने इस घोटाले को ‘दु:खद प्रकरण’ बताते हुए कहा कि दुर्भाग्य से राज्य पुलिस की जांच से निवेशकों का पैसा वसूल करने में कोई प्रगति नहीं हुई.
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