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मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिये

Updated at : 18 Dec 2019 2:14 AM (IST)
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मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिये

उदय कुमार बिहार के सारण जिले के बनियापुर थानांतर्गत बारोपुर गांव के हैं कोलकाता : मन में अगर दृढ़ इच्छाशक्ति व विश्वास हो तो व्यक्ति कुछ भी कर सकता है, फिर दिव्यांगता भी उस काम में आड़े नहीं आती. व्यक्ति अगर खुद को अक्षम या कमजोर मान ले तो वह कुछ भी नहीं कर सकता, […]

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उदय कुमार बिहार के सारण जिले के बनियापुर थानांतर्गत बारोपुर गांव के हैं

कोलकाता : मन में अगर दृढ़ इच्छाशक्ति व विश्वास हो तो व्यक्ति कुछ भी कर सकता है, फिर दिव्यांगता भी उस काम में आड़े नहीं आती. व्यक्ति अगर खुद को अक्षम या कमजोर मान ले तो वह कुछ भी नहीं कर सकता, लेकिन अगर ठान ले तो वह नामुमकिन को भी मुमकिन कर सकता है. यह जज्बा है 30 वर्षीय उदय कुमार का. उदय कुमार उन नौजवानों के लिए मिसाल हैं, जो जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं से घबरा कर, हिम्मत हार कर बैठ जाते हैं या जीवन से निराश हो जाते हैं.

उदय बायें पैर से 91 प्रतिशत डिसएबिल है, लेकिन एक साल में लगभग 31 मैराथन में सफलतापूर्वक भाग लेकर उन्होंने एक नया रिकार्ड कायम किया है. जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया रखनेवाले उदय ने बताया कि बिहार के सारण जिला के बनियापुर थानांतर्गत स्थित अपने गांव बारोपुर लौटते समय 2015 में एक रेल दुर्घटना में उनका बायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे डॉक्टरों को काट देना पड़ा.

शुरू में तो ऑपरेशन के बाद जयपुर फुट लगने से चलने-फिरने में उन्हें काफी दिक्कत होती थी. पैर में जख्म हो जाते थे लेकिन बाद में उनके बॉस अभिजीत बोस व यश मोर की सहायता से उसने प्रोस्थेटिक लेग लगवाया, जिससे काफी राहत मिली. इस पैर की मदद से वे चल भी पाते हैं व मैराथन में दौड़ भी पाते हैं.

प्रोस्थेटिक लेग की सफलता से लेकर उन्हें चलने के लिए मोटीवेट करने में डॉ. जयराज उनके लिए एक फरिश्ते साबित हुए. उदय बताते हैं कि रेल दुर्घटना से पहले ही उनकी शादी हो चुकी थी. उनकी मां व पिताजी अब इस दुनिया में नहीं हैं. उन पर पत्नी व दो बच्चों की जिम्मेदारी भी है.

घर के सभी काम करने के अलावा वे टू व्हीलर से एक निजी कंपनी में जाकर 8,000 रुपये की नौकरी भी कर रहे हैं. अागरपाड़ा में रहने वाले उदय 19 जनवरी को टाटा स्टील मुंबई मैराथन (10 किमी) में व फरवरी में फिर से आइडीबीआइ की दिल्ली मैराथन (21 किमी) में भी भाग लेंगे.

मैराथन में वे सामान्य श्रेणी में ही भाग लेते हैं. उदय का कहना है कि उनके दायें पैर में 5 की जगह 4 उंगलियां हैं. पैर का अंगूठा नहीं है, जिससे वे उस पर ज्यादा दबाव नहीं डाल सकते हैं, लेकिन मैराथन के नाम से उनके अंदर जोश भर जाता है. मैराथन में 10 किलोमीटर की दौड़ 2 घंटे में पूरी कर उन्होंने सफलता हासिल की.

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