बंगाल में ‘दलबदल’ से खुलती है जीत की राह? चौंकाने वाले संकेत दे रहे 3 चुनावों के आंकड़े

Published by :Mithilesh Jha
Published at :21 Apr 2026 9:13 PM (IST)
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West Bengal Defection Success Rate West Bengal Election 2026

West Bengal Defection Success Rate: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले एक बार फि दलबदल का खेल चला. टिकट बंटवारे के बाद भी पाला बदलने का दौर जारी है. ऐसा क्यों हो रहा है? आंकड़े बताते हैं कि बंगाल में दलबदल करने वाले 36 फीसदी उम्मीदवार चुनाव जीत जाते हैं. जानें टीएमसी और भाजपा का गणित.

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West Bengal Defection Success Rate: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के लिए नामांकन का दौर खत्म हो चुका है. दूसरे चरण के लिए नामांकन जारी है. 23 और 29 अप्रैल को होने वाले वोट से पहले राज्य में एक बार फिर पाला बदलने का खेल चला. क्या आप जानते हैं कि बंगाल की राजनीति में दल बदलना घाटे का सौदा है या फायदे का? पिछले 3 विधानसभा चुनावों (2011, 2016 और 2021) के आंकड़े बताते हैं कि ‘दलबदलू’ उम्मीदवारों के लिए बंगाल का चुनाव फायदे का सौदा रहा है.

36 प्रतिशत है दलबदलुओं का सक्सेस रेट

आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन चुनावों में अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी के टिकट पर कुल 135 उम्मीदवार चुनाव के मैदान में उतरे. इनमें से 49 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की. इसका मतलब साफ है कि बंगाल में दलबदल करने वाले हर तीसरे उम्मीदवार को जनता ने सिर माथे पर बिठाया. ऐसे प्रत्याशियों का ‘सक्सेस रेट’ करीब 36 प्रतिशत रहा है.

West Bengal Defection Success Rate: साल-दर-साल बढ़ा दलबदल का क्रेज

आंकड़ों पर गौर करने से पता चलता है कि दलबदल कर चुनाव लड़ने वाले नेताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. पिछले 3 चुनावों के डेटा पर आप भी जरा गौर कीजिए.

  • 2011 का बंगाल चुनाव : 30 उम्मीदवारों ने दल बदला. इनमें से 10 जीते.
  • 2016 का बंगाल चुनाव : 41 उम्मीदवारों ने पाला बदला. इनमें से 13 को जीत मिली.
  • 2021 का बंगाल चुनाव : इस साल सबसे ज्यादा दलबदलुओं ने चुनाव लड़ा. 64 उम्मीदवार दूसरी पार्टी से आये और रिकॉर्ड 26 ने जीत दर्ज की.

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TMC और BJP की पहली पसंद बने ‘टर्नकोट्स’

बंगाल की दो सबसे बड़ी पार्टियों ने टर्नकोट्स यानी दलबदलुओं पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया. अब तक जीतने वाले 49 दलबदलुओं में से 37 ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टिकट पर जीत हासिल की, जबकि 8 ने भाजपा (BJP) के चुनाव चिह्न पर परचम लहराया. 2021 का बंगाल चुनाव भाजपा के लिए खास था, क्योंकि पहली बार उसके टिकट पर 8 दलबदलुओं ने विधानसभा में एंट्री मारी.

शुभेंदु अधिकारी : दलबदल का सबसे बड़ा उदाहरण

वर्ष 2021 के दलबदल की चर्चा हो और शुभेंदु अधिकारी के नाम को नजरअंदाज कर दिया जाये, बंगाल की राजनीति में यह मुमकिन नहीं. 2021 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थामा और नंदीग्राम की हाई-प्रोफाइल सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मात दी. इसी तरह बशीरहाट उत्तर विधानसभा सीट से रफीकुल इस्लाम मंडल ने 2016 में सीपीआईएम के टिकट पर जीत दर्ज की थी और 2021 में टीएमसी में शामिल होकर दोबारा विधायक बने.

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बंगाल में घाटे का सौदा नहीं है पाला बदलना

आंकड़े स्पष्ट बता रहे हैं कि बंगाल विधानसभा चुनाव में पाला बदलना जोखिम भरा तो है, लेकिन यह कोई घाटे का सौदा नहीं है. यही वजह है कि 2026 के चुनाव से पहले कई नेताओं ने दलबदल किये. हालांकि, सभी को विधानसभा चुनाव लड़ने का टिकट नहीं मिला है, लेकिन कई ऐसे नेता हैं, जिनको इस बार भी नयी पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है.

  • मौसम नूर : एबीए गनी खान चौधरी की बहन की बेटी हैं. कांग्रेस छोड़कर लंबे समय तक ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में रहीं. चुनाव से पहले उन्होंने फिर से कांग्रेस में लौटने का फैसला किया और अब मालतीपुर से विधानसभा का चुनाव लड़ रहीं हैं.
  • संतोष पाठक : लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति करने वाले कोलकाता के नेता संतोष पाठक 2026 का बंगाल विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ रहे हैं. भगवा दल ने उन्हें चौरंगी से टिकट दिया है.
  • आशुतोष बर्मन : वर्षों तक अलग कूचबिहार राज्य की मांग करने वाले ग्रेटर कूचबिहार पीपुल्स एसोसिएशन (GCPA) के बंशीबदन बर्मन गुट के राजवंशी नेता आशुतोष बर्मन अब भाजपा के साथ हैं. उन्हें पार्टी ने सिताई से अपना उम्मीदवार बनाया है.
  • गिरिजा शंकर रॉय : इसी संस्था के एक और नेता हैं गिरिजा शंकर रॉय. भाजपा ने उन्हें नाटाबाड़ी विधानसभा सीट से टिकट दिया है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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