कैब होने के बाद डर के साये में नहीं जीना पड़ेगा

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के सीमावर्ती इलाके में रहनेवाले हिंदू शरणार्थियों की निगाहें नागरिकता संशोधन विधेयक पर टिकी हुई हैं. बांग्लादेश में एक हिंदू परिवार में जन्म लेनेवाला ज्योतिर्मय कक्षा नौ में पढ़ता है. बीते एक दशक से वह भारत में शरणार्थी की तरह रह रहा है. ज्योतिर्मय जैसे ही […]
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के सीमावर्ती इलाके में रहनेवाले हिंदू शरणार्थियों की निगाहें नागरिकता संशोधन विधेयक पर टिकी हुई हैं. बांग्लादेश में एक हिंदू परिवार में जन्म लेनेवाला ज्योतिर्मय कक्षा नौ में पढ़ता है. बीते एक दशक से वह भारत में शरणार्थी की तरह रह रहा है. ज्योतिर्मय जैसे ही लोग हैं जिनका भाग्य नए नागरिकता संशोधन बिल (कैब) से तय होगा. यह बिल सोमवार को लोकसभा में पास किया जा चुका है.
ज्योतिर्मय की 36 वर्षीय मां बारीशाल (बांग्लादेश) में अपना ससुराल छोड़कर बेहतर जीवन की उम्मीद से भारत आ गयी थी और फिलहाल बनगांव इलाके में रह रही हैं. ज्योतिर्मय की मां का कहना है कि उसके पति के दूसरी शादी कर लेने के बाद उसके सामने और कोई विकल्प नहीं बचा था. मेरा बेटा उस वक्त काफी छोटा था. हमें कंटीले तार को पार करना पड़ा. मैं घायल हुई, लेकिन मुझे एक ही बात पता थी और वह थी कि अगर मैं सरहद पार करने में कामयाब हुई, तो मैं बच जाऊंगी. हम बच जायेंगे.
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