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पटाखों के शोर से आफत में बेजुबानों की जान

Updated at : 29 Oct 2019 1:59 AM (IST)
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पटाखों के शोर से आफत में बेजुबानों की जान

धापा व इंटाली डॉग पाउंड में चल रहा इलाज निगम के धापा डॉग पाउंड में भर्ती 75 की हालत बिगड़ी इंटाली में भर्ती 17 कुत्तों की भी स्थिति खराब अतिशबाजी से एक कुत्ते की मौत, दो घायल कोलकाता : दिवाली पर पटाखे फोड़ने से आप अगर खुश होते हैं. इनकी आवाज को सुन कर खुशी […]

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धापा व इंटाली डॉग पाउंड में चल रहा इलाज

निगम के धापा डॉग पाउंड में भर्ती 75 की हालत बिगड़ी
इंटाली में भर्ती 17 कुत्तों की भी स्थिति खराब
अतिशबाजी से एक कुत्ते की मौत, दो घायल
कोलकाता : दिवाली पर पटाखे फोड़ने से आप अगर खुश होते हैं. इनकी आवाज को सुन कर खुशी के मारे चिल्‍ला उठते हैं, तो जान लीजिए कि किसी के लिए ये शोर जानलेवा है. अगर आप ध्यान दें तो सुबह से लेकर शाम तक अपने कलरव से माहौल को खुशनुमा बना देनेवाले पक्षी दिवाली के दिनों में खामोश से हो जाते हैं. पटाखों का शोर ही नहीं, बल्कि इनसे निकलनेवाली जहरीली गैस भी पशु पक्षियों के जीवन पर भारी पड़ जाती है. ऐसे में दिवाली में पटाखे फोड़ने से पहले पर्यावरण और पशु पक्षियों के बारे में एक बार जरूर सोच लें.
आतिशबाजी से विशेष कर आवारा कुत्तों व इस तरह के अन्य जानवरों को होनेवाली शारीरिक परेशानियों के संबंध में बता रहे हैं कोलकाता नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ सेफ्टी विंग के को-ऑडिनेटर राजीव घोष. राजीव एक पशु प्रेमी भी हैं. उन्होंने बताया कि सरकारी पाबंदी के बाद भी गत वर्ष की तुलना में इस साल आतिशबाजी अधिक हुई है.
महानगर के भवानीपुर, धापा व इंटाली इलाके में पाटखे फोड़े जाने से बेजुबान कुत्तों को सबसे अधिक भुगतना पड़ा. रविवार को धापा डॉग पाउंड में 150 कुत्ते इलाजरत थे. धापा इलाके में पटाखें फोड़ने से यहां भर्ती 75 से अधिक कुत्ते ट्रामाटाइज अवस्था में पहुंच गये. सभी डरे हुए हैं. उन्हें इस अवस्था से बाहर निकालने के लिए इलाज किया जा रहा है. श्री घोष ने बताया कि यही हालत इंटाली डॉग पाउंड की है. यहां दीपावली के दिन 33 कुत्ते भर्ती थे. उनमें से 17 की हालत अतिशबाजी के कारण बिगड़ गयी है.
डर से खाना नहीं खा रहे
उन्होंने बताया कि पटाखों की आवाज से डरे बेजुबान जानवर खाना नहीं खा पा रहे हैं. रविवार रात अतिशबाजी से महानगर के विभिन्न इलाकों में बीमार पड़े छह कुत्तों को धापा में भर्ती कराया गया है. राजीव ने कहा कि अतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रशासन केवल जागरूकता अभियान न चला कर पटाखों के उत्पादन को बंद कराये. वहीं जागरूकता के लिए पशु प्रेमियों की मदद लें.
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