हॉकर पुनर्वास को किया गया प्रयोग विफल टूटी-फूटी नावों में सिमटा ‘फ्लोटिंग मार्केट’
Updated at : 25 Aug 2019 3:21 AM (IST)
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ग्राहकों के लिए तरस रहा है तैरता बाजार आधी से अधिक दुकानें हुईं बंदनाव-रेलिंग टूटीं, सड़ गये वॉक-वे महीनों से खराब पड़ी है वाॅटर ट्रीटमेंट मशीन कोलकाता :महानगर को विदेशी रूप-रंग देने की कवायद में जुटे प्रशासन ने लगभग 16-17 महीने पहले पाटुली झील को बाजार में तब्दील कर दिया था. यह कहते हुए कि […]
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ग्राहकों के लिए तरस रहा है तैरता बाजार
आधी से अधिक दुकानें हुईं बंदनाव-रेलिंग टूटीं, सड़ गये वॉक-वे
महीनों से खराब पड़ी है वाॅटर ट्रीटमेंट मशीन
कोलकाता :महानगर को विदेशी रूप-रंग देने की कवायद में जुटे प्रशासन ने लगभग 16-17 महीने पहले पाटुली झील को बाजार में तब्दील कर दिया था. यह कहते हुए कि यह बैंकॉक के तैरते बाजार के सामान ही है, लेकिन आज आलम यह है कि इस झील बाजार में सन्नाटा पसरा है.
गौरतलब है कि कोलकाता विकास प्राधिकरण (केएमडीए) ने करीब नौ करोड़ की लागत से इसे बतौर ‘यूनिक वेंचर’ जनवरी 2018 में शुरू किया था. तब यहां 114 नावों में 228 दुकानें लगती थीं. लेकिन अब नजारा कुछ अलग ही है. घुसने के साथ ही खाली पड़ीं और टूटी-सड़ी-गली नाव बाजार की असलियत बयां करती हैं.
500 मीटर लंबे और 60 मीटर चौड़े इस बाजार में अब गिनती की 100 दुकानें हैं, जिनकी नाव भी टूटी हुई हैं. हाल ही में दुकानदारी के दौरान एक मछली विक्रेता रमेश मल्लिक अपनी नाव की पटरी समेत गिर पड़ा था. उसे काफी चोट भी आयी है. उसका कहना है कि सरकारी नाव है, कमजोर तो होगी ही, क्योंकि हॉकरों ने प्रशासन की जो बात मान ली. लेकिन यहां तो जान भी सांसत में है और रोटी को भी लाले पड़े हैं.
वहीं, नाई की दुकान लगानेवाले एक दुकानदार का कहना है कि फुटपाथ पर तो हजामत के लिए लोगों का तांता लगा रहता था. लेकिन इस चाहरदीवारी वाले बाजार में लोग फटकते भी नहीं हैं. गर्मी में धूप के कारण तो बारिश में लकड़ी के वॉक-वे पर फिसलन व भींगने के कारण. शुरुआत के एकाध महीने ही थोड़ी बहुत यहां भीड़ जुटती थी. उसके बाद तो ग्राहकों के लाले पड़ गये. बस सेल्फी पार्क बन के रह गया है यह बाजार. पुनर्वास के नाम पर दुकानदारी का तो बंटाधार हो गया है. कमोबेश यहां के सभी दुकानदारों का यही हाल है.
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