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पश्चिम बंगाल में भाजपा की कमान संभालने आ रहे हैं संघ से नये चेहरे

कोलकाता : राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की ओर से अंडमान-निकोबार में प्रचारक की भूमिका निभा रहे दिलीप घोष व संघ के प्रचारक सुब्रत चटर्जी को प्रदेश भाजपा की कमान देते ही पश्चिम बंगाल में भाजपा की चाल, चरित्र और चेहरा तीनों एक साथ बदल गये. देखते ही देखते भाजपा राज्य की नबंर तीन से बढ़ते […]

कोलकाता : राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की ओर से अंडमान-निकोबार में प्रचारक की भूमिका निभा रहे दिलीप घोष व संघ के प्रचारक सुब्रत चटर्जी को प्रदेश भाजपा की कमान देते ही पश्चिम बंगाल में भाजपा की चाल, चरित्र और चेहरा तीनों एक साथ बदल गये. देखते ही देखते भाजपा राज्य की नबंर तीन से बढ़ते हुए तृणमूल कांग्रेस की मुख्य विरोधी पार्टी बन गयी.

भाजपा के रणनीतिकारों का यह फॉर्मूला बिलकुल सही बैठा. इससे सीख लेते हुए बदली स्थिति में नेतृत्व फिर से तैयारी करने लगा है. भाजपा की कमान अब जेपी नड्डा संभालने जा रहे हैं.

वहीं, पश्चिम बंगाल में नेतृत्व का संकट खड़ा होने जा रहा है, क्योंकि दिलीप घोष, लाॅकेट चटर्जी व देवश्री चौधरी, डाॅ सुभाष सरकार सरीखे नेता सांसद बन गये हैं. इनका कार्यक्षेत्र दिल्ली और अपने संसदीय इलाके के अलावा देश भर में रहेगा. ऐसे में बंगाल दखल के अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए नये नेतृत्व की तलाश शुरू हो गयी है. भाजपा के सूत्रों के अनुसार पार्टी इस बार हिंदुत्ववादी संगठन के नेतृत्व पर ज्यादा भरोसा रख रही है. इसकी स्कैनिंग भी शुरू हो गयी है.

पर्दे पर भले ही दिलीप घोष सामने से रहकर भाषण देते रहे, लेकिन हकीकत में जमीनी स्तर पर आरएसएस के शाखा संगठनों ने जो मेहनत किया था, उसी का प्रमाण है कि राज्य की 18 सीटें भाजपा की झोली में आयीं. इस बार भाजपा के उम्मीदवारों में पत्रकार रंतिदेव सेनगुप्ता भी शामिल रहे, हालांकि वह तृणमूल के उम्मीदवार प्रसून्न बनर्जी से हार गये. वहीं, डाॅ सुभाष सरकार ने सुब्रत मुखर्जी को हरा दिया. इसके अलावा डाॅ मृणालकांति ने बारासात से काकोली घोष दस्तीदार से मुकाबला किया. यह सभी चेहरे भाजपा के परिचित चेहरे नहीं थे. इन्हें आरएसएस से काफी फायदा हुआ. ऐसे में नये चेहरों में भाजपा को सबसे ज्यादा भरोसा है. दो नाम ऐसे हैं, जो पश्चिम बंगाल के बुद्धजीवी समाज और आम जनता को स्वीकार्य हैं.

पहला नाम आरएसएस के दक्षिण बंगाल के कार्यवाह जिष्णु बसु का है. वह साहा इंस्टीच्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स में कार्यरत हैं. शिक्षित तो हैं ही, साथ में लोगों में काफी लोकप्रिय भी हैं. इसके अलावा दक्ष संगठक के रूप में विश्व हिंदू परिषद के सचिंद्रनाथ सिन्हा का नाम भी सामने आ रहा है. इतना ही नहीं, आरएसएस के करीबी विधानचंद्र कर का नाम भी सामने आ रहा है. कुल मिलाकर केंद्रीय मंत्री मंडल के गठन के बाद भाजपा को सांगठनिक रूप से सजाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश भाजपा में बदलाव करेगा.

Prabhat Khabar Digital Desk
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