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तृणमूल का वोट प्रतिशत बढ़ा, सीटें घटीं, कांग्रेस दो पर

Updated at : 24 May 2019 1:47 AM (IST)
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तृणमूल का वोट प्रतिशत बढ़ा, सीटें घटीं, कांग्रेस दो पर

वाममोर्चा नहीं खोल सका खाता कोलकाता : पूरे देश के साथ पश्चिम बंगाल में भी भाजपा को अभूतपूर्व सफलता मिली है. पार्टी 18 सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 22 सीटें मिलती दिख रही है. पिछली बार तृणमूल ने 34 सीटें जीती थीं. खबर लिखे जाने तक कांग्रेस दो सीटों पर […]

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वाममोर्चा नहीं खोल सका खाता

कोलकाता : पूरे देश के साथ पश्चिम बंगाल में भी भाजपा को अभूतपूर्व सफलता मिली है. पार्टी 18 सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 22 सीटें मिलती दिख रही है. पिछली बार तृणमूल ने 34 सीटें जीती थीं. खबर लिखे जाने तक कांग्रेस दो सीटों पर आगे थी. कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी बहरमपुर और अबु हाशेम खान चौधरी मालदा दक्षिण की सीट बचाने में सफल होते दिख रहे हैं.
राज्य में लगातार 34 वर्षों तक शासन करने वाला वाममोर्चा अपना खाता तक नहीं खोल सका है. राज्य की तृणमूल सरकार में मंत्री सुब्रत मुखर्जी, सांसद दिनेश त्रिवेदी, मुनमुन सेन, ममता बाला ठाकुर, डॉ रत्ना दे नाग और डॉ मानस भुइंया जैसे बड़े नेता चुनाव हार गये हैं. माकपा के मोहम्मद सलीम भी रायगंज की अपनी सीट नहीं बचा सके.
भाजपा को उत्तर बंगाल तथा जंगलमहल के इलाकों में बड़ी सफलता मिली है. दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, रायगंज, आसनसोल, बांकुड़ा, विष्णुपुर, हुगली, बनगांव जैसी कठिन माने जाने वाली सीटों पर भी भाजपा को विजय मिली. हालांकि तृणमलू के अभिषेक बनर्जी, माला राय, मिमी चक्रवर्ती, नुरसत जहां, सुदीप बंद्योपाध्याय, प्रसून बनर्जी, दीपक अधिकारी (देव), कल्याण बनर्जी, सौगत राय, डॉ काकोली घोष दस्तिदार, शिशिर अधिकारी, दिव्येंदू अधिकारी को सफलता हासिल हुई है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नतीजों के घोषित होने के बाद जीतने वाले प्रत्याशियों को बधाई दी. साथ ही यह भी कहा कि पराजित होने वालों की भी हार नहीं हुई है. दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा मुख्यालय में जश्न का माहौल था. कार्यकर्ता सड़क पर उतर आये और मिठाइयां बांटने लगे. इस चुनाव में सबसे बुरा हाल वाममोर्चा का रहा. राज्य में वह खाता भी नहीं खोल सका. माना जा रहा है कि माकपा का वोट सीधे भाजपा को ट्रांसफर हुआ है. उल्लेखनीय है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के मुताबिक राज्य में तृणमूल को 39.05 फीसदी वोट मिले थे.
माकपा सहित अन्य वाम दलों को 29.71 फीसदी, भाजपा को 17.02 फीसदी तथा कांग्रेस को 9.58 फीसदी वोट मिले थे. हालांकि इस बार के लोकसभा चुनाव में तृणमूल को 43.38 फीसदी तथा भाजपा को 40.2 फीसदी वोट मिले हैं. जबकि वामदलों को करीब 7.55 फीसदी वोट हासिल हुए हैं. पिछली बार के वाम दलों का वोट प्रतिशत करीब 30 फीसदी से घटकर 7.50 प्रतिशत रह गया है.
यानी उनके वोट प्रतिशत में 22.50 फीसदी की कमी आयी है. भाजपा का वोट प्रतिशत पिछली बार की तुलना में 22.18 फीसदी बढ़ा है. तृणमूल का वोट प्रतिशत भी 4.33 फीसदी बढ़ा है. कांग्रेस का वोट शेयर 1.10 फीसदी घटा है. स्पष्ट है कि भाजपा को जो बढ़त मिली है वह मूल रूप से वामदलों के वोट बैंक में सेंध लगाकर मिली है.
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