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समाज को डीके सराफ जैसे लोगों की जरूरत : तथागत राय

Updated at : 20 Jan 2019 2:31 AM (IST)
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समाज को डीके सराफ जैसे लोगों की जरूरत : तथागत राय

भीखमचंद पुगलिया की पुस्तक का मेघालय के राज्यपाल तथागत राय व डीके सराफ ने किया विमोचन कोलकाता. आजकल लोग स्वार्थ के पीछे दौड़ रहे हैं, एेसे समय में डीके सराफ जैसे व्यक्ति की जरूरत है जो सामाज की सेवा करने के लिए जीतें हैं, यह समाज के लिए गौरव की बात है. आज आनंदलोक सेवा […]

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भीखमचंद पुगलिया की पुस्तक का मेघालय के राज्यपाल तथागत राय व डीके सराफ ने किया विमोचन
कोलकाता. आजकल लोग स्वार्थ के पीछे दौड़ रहे हैं, एेसे समय में डीके सराफ जैसे व्यक्ति की जरूरत है जो सामाज की सेवा करने के लिए जीतें हैं, यह समाज के लिए गौरव की बात है. आज आनंदलोक सेवा के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान बन गया है.
ये बातें मेघालय के राज्यपाल तथागत राय ने भीखमचंद पुगलिया द्वारा रचित ‘व्यूज ऑन आनंदलोक: फ्राम ए न्यू एंगल’ पुस्तक का विमोचन करते हुए कहीं. उन्होंने कहा कि आनंदलोक के संस्थापक देव कुमार सराफ, सामाजिक सेवाओं के लिए जाने जायेंगे.
उन्होंने कहा कि आजकल हिंदी सीखने की जरूरत है. मैं गैर हिंदी भाषी होते हुए भी हिंदी बोलता हूं. कुछ लोग हिंदी के विरोध में आंदोलन करते हैं कि हिंदी नहीं सीखेगें. हिंदी हम पर थोपी जा रही है. वे लोग अंग्रेजी में प्रचार करते हैं. स्वदेशी भाषा का विरोध विदेशी भाषा में किया जा रहा है, जो गलत है. उन्होंने कहा कि मेेरे पूर्वज बांग्लादेश के हैं, लेकिन मैं पूर्णत: भारतीय हूं.
वर्षों से बंगाल में रहनेवाले प्रवासी अपने को बंगाली समझें, यह समय की जरूरत है. इस अवसर पर भीखमचंद पुगलिया ने कहा कि आनंदलोक के संस्थापक देव कुमार सराफ ने समाज सेवा को एक नया आयाम दिया है. जिससे समाज के सभी लोगों को सीख लेने की जरूरत है. आंनदलोक के तत्वावधान में मेघालय के राज्याल तथागत राय का लाइफटाइम एचीवमेंट के लिए नागरिक अभिनंदन साल्ट लेक स्थित बिग बाजार सभागार में किया गया.
वहीं आनंदलोक के ट्रस्टी एवं संस्थापक देव कुमार सराफ ने कहा कि 1981 में आनंदलोक का जन्म एक गैरेज से हुआ. उस समय प्रतिकूल अवस्था थी. आज लगभग 38 साल छह महीने हो गये. आज आनंदलोक की 32 शाखाएं हो चुकी हैं. उस समय हमारे पास चार कर्मचारी थे, लेकिन आज 1568 कर्मचारी हो गये हैं.
उस समय हमारा खर्च तीन हजार रुपये प्रति महीना था जो आज 3 करोड़ 65 लाख महीने का खर्च हो गया है. ईश्वर की कृपा से हमारा चेक कभी बाउंस नहीं होता.
हमने कभी संपति नहीं बनायी. पर ठाकुर की कृपा से बन गयी. मेरा विश्वास है कि मनुष्य की सेवा करते रहिए. ठाकुर की कृपा अपने आप मिलती रहेगी. यह प्रसन्नता की बात है कि आनंदलोक, लोगों की शारीरिक व मानसिक समस्याओं का समाधान करता है.
यह हमारे लिए गौरव की बात है कि मात्र 85 हजार रुपये में भी हम बाइपास सर्जरी करते हुए लाभ कमा रहे हैं. ठाकुर की कृपा से सामाजिक सेवा करने का अवसर मिला है. ठाकुर से मेरी यह प्रार्थना है कि राजारहाट में अस्पताल खोलने में जो दिक्कत आ रही है, उसे दूर करने की कृपा करें. वहीं समाजसेवी संपतमल बच्छावत ने डीके सराफ के कार्यों की सराहना की.
इस अवसर पर भारत सेवाश्रम संघ के अध्यक्ष स्वामी प्रदीप्तानंद जी महाराज ने कहा कि सेवा करनेवाले व्यक्ति को अहंकार व प्रचार से दूर रहना चाहिए. कार्यक्रम में रमेश नांगलिया, पदम कुमारजी रायजादा, पवन चोमाल, बाबूलाल धनानियां, किशन लाल बजाज, चंद्रशेखर जायसवाल सहित अन्य गणमान्य मौजूद थे.
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