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कोलकाता : वेदों की शिक्षा में ही छिपा है जीवन का सार : स्वामी रामदेव

Updated at : 23 Dec 2018 9:09 AM (IST)
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कोलकाता : वेदों की शिक्षा में ही छिपा है जीवन का सार : स्वामी रामदेव

स्वामी जी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से वैदिक स्कूलों के विकास में सहयोग करने अपील की भारती जैनानी कोलकाता : दक्षिण 24 परगना के गोविंदपुर इलाके में एक एेसा विद्यालय चल रहा है, जहां मात्र 55 विद्यार्थी वेदों की पढ़ाई कर रहे हैं. सफेद व गेरूआ वस्त्रों के साथ, मंत्रों के उच्चारण व माथे पर […]

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स्वामी जी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से वैदिक स्कूलों के विकास में सहयोग करने अपील की
भारती जैनानी
कोलकाता : दक्षिण 24 परगना के गोविंदपुर इलाके में एक एेसा विद्यालय चल रहा है, जहां मात्र 55 विद्यार्थी वेदों की पढ़ाई कर रहे हैं. सफेद व गेरूआ वस्त्रों के साथ, मंत्रों के उच्चारण व माथे पर तिलक लगाये हुए ये बच्चे भारतीय संस्कृति की परंपरा को देश भर में समृद्ध कर रहे हैं. यह पाठशाला श्री गाैरांग वेद विद्यालय कैंपस, बारुली (दक्षिण 24 परगना) के नाम से चल रही है.
इसी के कैंपस में शनिवार को पूर्वी भारत की प्रथम इंटरनेशनल वेदिक पाठशाला का उद्घाटन योग ऋषि स्वामी रामदेव महाराज व आचार्य स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज द्वारा किया गया. वेद शिक्षा ले रहे बच्चों को योगगुरु ने कहा कि वेद पढ़नेवाले बच्चे हमेशा अपने को हीरे समान बहुमूल्य समझें, क्योंकि वेद पढ़नेवाले बहुत कम हैं. वेदों में ही जीवन का सार छिपा हुआ है. संस्कृत भाषा अपने आप में सबसे दिव्य व विज्ञान आधारित भाषा है. वेद-विद्यालयों में पढ़नेवाला वेदपाठी बच्चा जहां भी रहेगा, समृद्धि व लक्ष्मी उसका स्वागत करेंगी. वेद हमारी भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है. इंटरनेशनल वैदिक पाठशाला में विद्यार्थी की ट्रेनिंग, अपने आप में अद्भुत है.
यहां से पढ़कर बच्चे वैदिक पंडित के रूप में विदेश में जायेंगे, तो भारतीय संस्कृति के एंबेस्डर बन जायेंगे. यहां पांचवीं के बाद नौ से 12 साल के बच्चे प्री-प्रवेश परीक्षा के अाधार पर दाखिला ले सकते हैं. सात साल यहां वेदों की पढ़ाई करने के बाद विद्यार्थियों को ‘वेद विभूषण ’(12वीं ग्रेड के समान) की डिग्री प्रदान की जायेगी. उन्होंने कहा कि बंगाल की सरकार को एेसी वेद पाठशालाओं के लिए सहयोग करना चाहिए, जिससे पूरे देश का विकास होगा.
गुरुदेव गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि वेदों के बिना रामायण व भगवत गीता की कल्पना नहीं की जा सकती है. आज के दौर में वेदों की संस्कृति को बढ़ाने की जरूरत है. उन्हें इस कार्य की प्रेरणा कांचीपीठ आधिपति ब्रह्मलीन स्वामी श्री जयेंद्र सरस्वती महाराज से मिली.
यह पाठशाला संदीपनी वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन से एफिलियेटेड है, जो मानव संसाधन विकास मंत्रालय के वैदिक अध्ययन केंद्र से जुड़ी है. यहां से पढ़ने के बाद छात्र संस्कृत यूनिवर्सिटी, नागपुर से वैदिक अध्ययन में बैचलर ऑफ आर्ट्स व मास्टर ऑफ आर्ट्स करने के लिए क्वालीफाइ माने जायेंगे. कार्यक्रम में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने वीडियो के जरिये अपने संदेश में कहा कि वेद हमारी समृद्ध परंपरा है.
आधुनिक शिक्षा व वेद के मिलाप से एक नयी शिक्षा पद्धति तैयार की जा रही है. इससे बच्चे भारतीय विचार-दर्शन, भारतीय एस्ट्रोनॉमी व साइंस आधारित ज्ञान अर्जित कर पायेंगे. विद्यालय के संस्थापक सुधीर जालान ने कहा कि यह ‘इंटरनेशनल वैदिक पाठशाला’ उनकी माता स्व शांति देवी जालान की स्मृति में बनायी गयी है. इस पाठशाला का मकसद यही है कि बच्चे वैदिक मंत्रों के माैखिक उच्चारण की परंपरा बरकरार रहे व वैदिक साहित्य का प्रसार होता रहे.
युवा पीढ़ी के बीच वेदों की संस्कृति कहीं विलुप्त होती नजर आ रही है. पूरे देश में 34 वेद पाठशाला स्थापित की गयी है. इनमें से यह एकमात्र इंटरनेशनल वेद पाठशाला होगी, जहां शिक्षा-दीक्षा व प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थी यूरोप, अमेरिका व अन्य देशों में फैले हिंदू मंदिरों व धार्मिक स्थानों के संचालक बन सकते हैं.
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